Gurdaspur News: गुरदासपुर में दिखाई जा रही ‘सतलुज’ फिल्म, प्रोजेक्टर किराए पर लेकर युवाओं ने शुरू की स्क्रीनिंग
गुरदासपुर में दिखाई जा रही 'सतलुज' फिल्म
Gurdaspur News: पंजाब के गुरदासपुर जिले में दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज‘ की स्क्रीनिंग अब गांव-गांव में की जा रही है। फिल्म पर प्रतिबंध लगने के बाद इसे देखने वालों की संख्या बढ़ी है। अब कई युवा अपने निजी खर्च पर प्रोजेक्टर किराए पर लेकर अलग-अलग गांवों में फिल्म का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एक साथ इसे देख रहे हैं। इस पहल के चलते गांवों में सामुदायिक स्तर पर फिल्म देखने का माहौल बन रहा है। अलग-अलग वर्ग और धर्म के लोग एक ही स्थान पर बैठकर फिल्म देख रहे हैं, जिसे स्थानीय लोग सकारात्मक सामाजिक संदेश मान रहे हैं।
युवाओं ने अपने स्तर पर शुरू की पहल
अब तक सामाजिक संगठनों, किसान संगठनों और सिख संस्थाओं की ओर से प्रोजेक्टर के माध्यम से फिल्म की स्क्रीनिंग की जा रही थी। अब इसमें स्थानीय युवाओं ने भी हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। युवा अपने स्तर पर प्रोजेक्टर किराए पर लेकर गांवों में फिल्म दिखा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे देख सकें।
बुजुर्गों और महिलाओं को भी मिल रहा अवसर
इस पहल का लाभ उन बुजुर्गों और महिलाओं को भी मिल रहा है, जो सामान्य परिस्थितियों में सिनेमाघर तक नहीं पहुंच पाते। गांव में ही स्क्रीनिंग होने से वे भी आसानी से फिल्म देख पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामूहिक स्क्रीनिंग के कारण परिवारों और ग्रामीणों को एक साथ फिल्म देखने का अवसर मिल रहा है।
किसान नेता बोले- सभी धर्मों के लोग साथ बैठ रहे हैं
गुरदासपुर में स्क्रीनिंग अभियान शुरू करने वाले युवा किसान नेता इंद्रपाल सिंह बैंस ने कहा कि यह समाज के लिए सकारात्मक संकेत है कि सभी धर्मों के लोग एक साथ बैठकर फिल्म देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक संवाद भी बढ़ रहा है और लोग फिल्म के विषय को समझने का प्रयास कर रहे हैं।
पुराने दौर की तरह लौट रहा सामूहिक फिल्म देखने का माहौल
इंद्रपाल सिंह बैंस ने कहा कि पहले गांवों में लोग वीसीआर किराए पर लेकर एक जगह इकट्ठा होकर फिल्में देखते थे। अब उसी तरह का माहौल ‘सतलुज’ फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि फिल्म को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और विभिन्न गांवों से स्क्रीनिंग कराने के लिए लगातार मांग भी आ रही है।
