July 18, 2026

Jagannath Rath Yatra: मंदिर से बाहर आए भगवान जगन्नाथ, मुसलाधार बारिश में भी उमड़ा आस्था का सैलाब

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Jagannath Rath Yatra: मंदिर से बाहर आए भगवान जगन्नाथ, मुसलाधार बारिश में भी उमड़ा आस्था का सैलाब

सात समंदर पार से आए विदेशी भक्त, जगन्नाथ रथ यात्रा के जयकारों से गूंजी पुरी, अनुष्ठान पूरे

Jagannath Rath Yatra: सनातन धर्म के सबसे बड़े और अलौकिक उत्सवों में शामिल  की जगन्नाथ रथ यात्रा का शंखनाद हो चुका है। ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर से महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और लाडली बहन देवी सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण के लिए निकल चुके हैं। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और हरि बोल के गगनभेदी जयकारों के बीच तीनों विग्रहों को मंदिर से बाहर लाया जा रहा है।

भगवान यहां से अपने भव्य और विशाल रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। मान्यता है कि इस पावन यात्रा के दौरान जो भी श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी को छू लेता है या खींचता है, उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और मोक्ष का रास्ता खुल जाता है।

पुरी में आज सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ है और तेज बारिश हो रही है, लेकिन आस्था के इस समंदर के आगे मौसम भी बौना साबित हो गया है।

मुसलाधार बारिश के बीच भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर के सिंहद्वार पर टस से मस नहीं हुए हैं। हर कोई बस अपने आराध्य की एक झलक पाकर जीवन को धन्य कर लेना चाहता है। इस बार भारत के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं के अलावा, सात समंदर पार से भी भारी संख्या में विदेशी भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने और इस अद्भुत संस्कृति का साक्षी बनने पुरी पहुंचे हैं।

सज-धज कर तैयार हुए तीनों दिव्य रथ, मशहूर गायक सोनू निगम भी पहुंचे पुरी

रथ यात्रा को लेकर इस बार सुरक्षा और प्रबंधन के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस भव्य उत्सव का हिस्सा बनने मशहूर बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम भी पुरी पहुंचे हैं। भगवान के दर्शन के बाद भावुक हुए सोनू निगम ने कहा, “मैंने भगवान जगन्नाथ के लिए कई बार भजन गाए हैं, लेकिन यहाँ आकर साक्षात दर्शन करने का यह मेरा पहला अनुभव है। मैंने यहाँ जो अलौकिक दृश्य देखा है, वह जिंदगी भर मेरे जेहन में रहेगा। यहाँ का मैनेजमेंट वाकई काबिले तारीफ है।”

इस महायात्रा के लिए तीनों रथों को महीनों की कड़ी मेहनत के बाद पारंपरिक विधि से नई लकड़ियों से तैयार किया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ के लिए ‘नंदीघोष रथ’, बड़े भाई बलभद्र के लिए ‘तालध्वज रथ’ और बहन सुभद्रा के लिए ‘दर्पदलन (देवदलन) रथ’ को भव्य रूप से सजाया गया है।

रथ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले सभी वैदिक और तांत्रिक अनुष्ठान पूरे कर लिए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए नंदीघोष रथ पर संकटमोचन श्रीहनुमान, तालध्वज पर भगवान नृसिंह और देवदलन रथ पर शक्ति स्वरूपा मां भुवनेश्वरी की विधिवत स्थापना की गई है, जो पूरे रास्ते इन दिव्य रथों की रक्षा करेंगे।

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