Deepender Hooda: संसद में दीपेंद्र हुड्डा बोले- ‘पेपर लीक हुआ तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो’
संसद में दीपेंद्र हुड्डा बोले- 'पेपर लीक हुआ तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो'
Deepender Hooda: संसद के पटल पर रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्र सरकार की मंशा पर सीधे सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार जो नया बिल लेकर आई है, वह न तो अपने मन से लाई है, न दिल से और न ही दिमाग से।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का असल मकसद तो हमेशा से युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाने और कुचलने का रहा है। लेकिन जब स्थिति हाथ से निकलने लगी और पानी नाक से ऊपर चला गया, तब जाकर सरकार ने आनन-फानन में इस बिल का ऐलान किया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और 60 दिन की जांच का दावा महज़ जुमला?
सरकार के दावों की हवा निकालते हुए हुड्डा ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के आंकड़े सामने रखे। उन्होंने इसे भारतीय जनता पार्टी सरकार का नया जुमला करार देते हुए कहा कि इस समय पूरे देश में लगभग 800 फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वहां ढाई लाख से ज्यादा मामले धूल फांक रहे हैं और लंबित पड़े हैं।
60 दिनों के भीतर जांच पूरी करने की समय-सीमा पर तंज कसते हुए उन्होंने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई। हुड्डा ने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में हुए नीट और अन्य पेपर लीक मामलों में सीबीआई आज तक ठोस सबूत जुटाने में नाकाम रही है।
‘अगली बार पेपर लीक हुआ तो सबसे पहले इस्तीफा दें शिक्षा मंत्री’
संसद में अपनी बात रखते हुए कांग्रेस सांसद ने कड़े कानून की वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई पेपर लीक रोकने को लेकर गंभीर है, तो कानून में ऐसी सख्त जवाबदेही तय होनी चाहिए कि भविष्य में अगर एक भी पेपर लीक की घटना हो, तो सबसे पहले देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे सख्त दिखने वाले कानूनों का कोई असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देगा।
युवाओं और Gen-Z के जज्बे को सलाम
भाषण के आखिरी हिस्से में दीपेंद्र हुड्डा ने देश के युवाओं और Gen-Z की समझदारी और धैर्य की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश का युवा न सिर्फ आने वाला कल है, बल्कि आज के दौर की भी सबसे समझदार आवाज बनकर उभरा है। जिस तरह से युवाओं ने अहिंसा और शांति के रास्ते पर चलते हुए अपने हक और देश के गंभीर मुद्दों को रेखांकित किया है, वह काबिले-तारीफ है। युवाओं के इस आंदोलन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में कोई सरकार या नेता नहीं, बल्कि जनता ही असली राजा और सबसे बड़ी ताकत होती है।
