Haryana School News: सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्राओं ने की नारेबाजी, कनीना मंडी के प्रिंसिपल नरेश कुमार सस्पेंड
कनीना मंडी स्कूल की छात्राओं द्वारा नारेबाजी मामले में प्राचार्य सस्पेंड
Haryana School News: महेंद्रगढ़ जिले के कनीना मंडी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद मामला गरमा गया है। हरियाणा सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग द्वारा 19 जुलाई 2026 को जारी आदेशों के तहत उन्हें हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के अधीन सस्पेंड किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, महेंद्रगढ़ तय किया गया है। हालांकि, सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में विद्यालय के किसी भी शिक्षक या कर्मचारी की भूमिका से साफ तौर पर इंकार किया था। इसके बावजूद सरकार द्वारा देर शाम जारी आदेश में निलंबन का कोई स्पष्ट कारण बताए बिना कार्रवाई कर दी गई।
इंटरनेट से प्रभावित होकर छात्राओं ने खुद बनाया था प्लान
घटनाक्रम 17 जुलाई का है, जब कनीना मंडी से बस स्टैंड की ओर जाते समय करीब 10 से 12 छात्राओं का हाथ में पोस्टर लेकर नारेबाजी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। छात्राएं प्रसिद्ध पर्यावरणविद् व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन और भाजपा के खिलाफ नारे लगा रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने तुरंत संज्ञान लिया और डीईओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच समिति बनाई गई।
जांच समिति ने छात्राओं, उनके परिजनों, प्राचार्य और स्टाफ के बयान दर्ज किए। छात्राओं ने अधिकारियों को बताया कि वे इंटरनेट व सोशल मीडिया पर चल रहे सोनम वांगचुक के आंदोलन से प्रभावित थीं। उन्हें अंदेशा था कि यदि वे इस बारे में स्कूल या घर पर बतातीं तो उन्हें अनुमति नहीं मिलती। इसी वजह से उन्होंने स्कूल की छुट्टी होने के बाद परिसर से काफी दूर जाकर प्रदर्शन किया। पोस्टर भी छात्राओं ने स्वयं ही तैयार किए थे और इसमें किसी भी शिक्षक या बाहरी व्यक्ति का कोई उकसावा या सहयोग नहीं था।
‘अगर जानकारी होती तो समझाते’—प्राचार्य का पक्ष
कार्रवाई के बाद प्राचार्य नरेश कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पूरी घटना स्कूल परिसर के बाहर और छुट्टी होने के बाद घटी है। उन्हें इस बारे में कोई अंदेशा नहीं था और घटना की जानकारी भी अधिकारियों के माध्यम से ही मिली। प्राचार्य ने बताया कि उन्होंने विभाग के समक्ष अपना लिखित स्पष्टीकरण भी दर्ज करा दिया है। अगर उन्हें छात्राओं की इस योजना का जरा भी पता चलता तो वे समय रहते उन्हें ऐसा करने से रोकते और समझाते।
इस एकतरफा निलंबन के बाद से हरियाणा के शिक्षक संगठन और स्थानीय ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। शिक्षकों का तर्क है कि जब घटना स्कूल समय के बाद और परिसर के बाहर हुई है, तथा जांच समिति की रिपोर्ट में प्राचार्य की कोई सीधी या अप्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं मिली, तो बिना किसी विस्तृत विभागीय जांच के ऐसा फैसला देना अनुचित है। लोगों की मांग है कि पूरे मामले पर निष्पक्षता से विचार किया जाए।
