Haryana Sikh Jatha Pakistan: भारत के इतिहास में ‘शेर-ए-पंजाब’ के नाम से विख्यात महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि (बरसी) के मौके पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दीदार के लिए हरियाणा के सिख श्रद्धालुओं का एक जत्था रविवार को वाघा-अटारी अंतरराष्ट्रीय सीमा से पाकिस्तान के लिए रवाना हो गया। इस भावुक और आध्यात्मिक यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के चेहरों पर जहां एक ओर अपने गुरुधामों के दर्शन की उत्कंठा थी, वहीं दूसरी ओर विभाजन के इतिहास को समेटे अटारी बॉर्डर पर ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के तत्वावधान में जा रहे इस जत्थे को विदा करने और तमाम जरूरी औपचारिकताएं पूरी करवाने के लिए कमेटी के यात्रा प्रभारी सरदार बिंदर सिंह खालसा और इंचार्ज हरकीरत सिंह विशेष रूप से सीमा पर मौजूद रहे।
सरकार से मिली थी 66 की मंजूरी, 60 ने भरी हुंकार
यात्रा प्रभारी सरदार हरकीरत सिंह ने सीमा पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और पाकिस्तानी दूतावास के बीच हुए त्रिपक्षीय संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के बाद इस बार हरियाणा के कोटे से 66 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान जाने की आधिकारिक अनुमति (वीजा) मिली थी। हालांकि, ऐन वक्त पर कुछ तकनीकी कारणों और अपरिहार्य घरेलू वजहों से 6 श्रद्धालु इस यात्रा पर नहीं जा सके, जिसके चलते कुल 60 श्रद्धालुओं का यह दल पाकिस्तान की धरती पर कदम रख रहा है।
इस जत्थे की कमान और गरिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आम संगत के साथ-साथ हरियाणा कमेटी के आंतरिंग कमेटी मैंबर सरदार जगतार सिंह मीठड़ी और सरदार हरकेश सिंह मोहड़ी भी खुद इस दल के साथ पाकिस्तान रवाना हुए हैं। यह पदाधिकारी वहां पाकिस्तानी वक्फ बोर्ड और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सामने हरियाणा की संगत की सहूलियतों को लेकर भी चर्चा करेंगे।
पवित्र गुरुद्वारों में टेकेंगे माथा, याद आएंगे महाराजा रणजीत सिंह
यह जत्था पाकिस्तान पहुंचने के बाद लाहौर स्थित महाराजा रणजीत सिंह की समाधि, ननकाना साहिब (गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व स्थल) और करतारपुर साहिब समेत कई अन्य ऐतिहासिक और पूजनीय सिख धार्मिक स्थलों का दौरा करेगा। महाराजा रणजीत सिंह का शासनकाल सिख इतिहास का वह स्वर्ण युग माना जाता है, जिसमें धर्मनिरपेक्षता और न्याय की मिसाल पेश की गई थी। यही वजह है कि उनकी बरसी पर वहां आयोजित होने वाले मुख्य समागम में शामिल होना हर सिख श्रद्धालु अपने जीवन का अहोभाग्य मानता है।
जत्थे की रवानगी के इस बेहद खास मौके पर सीमा पर व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए सरदार रणजीत सिंह, सरदार तनवीर सिंह और सरदार प्रभजोत सिंह सहित कई स्थानीय सिख नेता और सेवादार भी मौजूद रहे, जिन्होंने वाघा बॉर्डर के ‘जीरो लाइन’ तक जाकर यात्रियों को विदा किया। हरियाणा राज्य से जो पाकिस्तान जाता रवाना हुआ उसकी हरियाणा सरकार भारत सरकार से इजाजत की पूरी कार्रवाई हरियाणा कमेटी के यात्रा विभाग द्वारा इंचार्ज व सहायक गुरप्रीत कौर द्वारा निभाई गई संगत ने उनका भी धन्यवाद किया

