Haryana Weather: हरियाणा में मानसून की धमाकेदार एंट्री, इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
हरियाणा में मानसून की एंट्री, सुबह-सुबह झमाझम बरसे बादल
Haryana Weather: चिलचिलाती धूप और उमस से बेहाल हरियाणा के लोगों के लिए गुरुवार की सुबह बड़ी राहत लेकर आई। प्रदेश के एक बड़े हिस्से में मानसून ने आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है। सुबह से ही हिसार, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, करनाल, गुरुग्राम और फतेहाबाद सहित अहीरवाल बेल्ट में काले बादलों ने डेरा डाला और जमकर बारिश हुई। दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे और आस-पास के इलाकों में सुबह करीब 8 बजे तक लगातार मूसलाधार बारिश दर्ज की गई, जिससे वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर निकलना पड़ा। मौसम विभाग का कहना है कि आगामी 48 घंटों के भीतर मानसूनी हवाएं पूरे सूबे को अपने आगोश में ले लेंगी।
12 साल में दूसरी बार इतनी बड़ी देरी, बढ़ी चिंता
इस बार इंद्रदेव ने हरियाणा के किसानों और आम जनता को थोड़ा ज्यादा तरसाया है। अमूमन प्रदेश में मानसून 29 जून तक एंट्री कर जाता है, लेकिन इस बार यह 48 घंटे की देरी से 1 जुलाई को दाखिल हुआ। पिछले 12 सालों का रिकॉर्ड खंगालें तो यह दूसरा मौका है जब मानसून इस तारीख तक लेट हुआ है। इससे पहले साल 2014 में भी मानसून ने ठीक 1 जुलाई को ही दस्तक दी थी। मौसम के इस बदले मिजाज और देरी ने कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई पूरी तरह इन शुरुआती फुहारों पर टिकी होती है।
इस साल सूखे के आसार? सामान्य से कम बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन ने राहत के बीच एक बड़ी चिंता भी खड़ी कर दी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल हरियाणा में सामान्य से करीब 12 फीसदी कम बारिश हो सकती है। जून का महीना पहले ही सूखा निकल चुका है, जिसमें सामान्य से 31 प्रतिशत कम (महज 40 मिलीमीटर) पानी गिरा। गौरतलब है कि राज्य में मानसून का सामान्य औसत 440 मिलीमीटर रहता है। साल 2014 में भी जब मानसून इतनी ही देरी से आया था, तब प्रदेश को सूखे जैसे हालात का सामना करना पड़ा था और सामान्य से 57 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई थी।
पिछले साल के मुकाबले 7 दिन पीछे, आंकड़े दे रहे गवाही
अगर बीते साल 2025 से तुलना करें तो इस बार मानसून करीब सात दिन की देरी से चल रहा है। पिछले वर्ष 24 जून को ही सूबे के कुछ हिस्सों में बौछारें पड़ गई थीं और 29 जून तक पूरा हरियाणा तरबतर हो चुका था। इतिहास पर नजर डालें तो राज्य में सबसे पहले मानसून 13 जून 2008 को आया था, जबकि सबसे लेट एंट्री का रिकॉर्ड साल 1987 के नाम है, जब 27 जुलाई तक लोग बूंद-बूंद को तरस गए थे। पिछले साल (2025) में कुदरत मेहरबान थी और सामान्य से 34 प्रतिशत अधिक यानी 568.4 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जिसमें फतेहाबाद, महेंद्रगढ़ और कुरुक्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ पानी बरसा था।
पारे में भारी गिरावट, जलभराव का अलर्ट जारी
बारिश की इस पहली दस्तक ने सीधे तौर पर आम आदमी को तपती गर्मी से बचा लिया है। कुछ दिनों पहले तक जो अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच टॉर्चर कर रहा था, वह अब सीधे गिरकर 35 से 38 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र जैसे उत्तरी जिलों में अगले कुछ दिन 75 से 100 फीसदी तक भारी बारिश की संभावना है। वहीं सिरसा और हिसार बेल्ट में बादल छाए रहेंगे। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के चलते रिहायशी और निचले इलाकों में जलभराव और सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग सकता है, इसलिए लोग घरों से निकलते समय सावधानी बरतें।
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