Hydrogen Train: जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन 160 KM का सफर और 12 गुना घाटा, जानें क्यों महंगी पड़ रही यह ट्रेन
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पर मंडराया घाटे का साया! रोजाना बिक रहे सिर्फ 7000 के टिकट
Hydrogen Train: हरित ऊर्जा की दिशा में भारतीय रेलवे के ऐतिहासिक कदम के रूप में शुरू की गई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन इन दिनों जींद-सोनीपत ट्रैक पर रफ्तार भर रही है। पर्यावरण के लिहाज से इसे भले ही बड़ी क्रांति माना जा रहा हो, लेकिन वित्तीय मोर्चे पर यह ट्रेन फिलहाल रेलवे के लिए काफी महंगी साबित हो रही है। जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली इस ट्रेन का रोजाना का संचालन खर्च इसकी कुल कमाई से करीब 12 गुना अधिक दर्ज किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेन को चलाने में प्रतिदिन करीब 80 से 90 हजार रुपये की हाइड्रोजन गैस की खपत हो रही है। इसके उलट, टिकट खिड़की से होने वाली दैनिक आय औसतन महज सात हजार रुपये के आसपास ही सिमटकर रह जाती है।
160 किलोमीटर के सफर में 500 रुपये प्रति किलोमीटर की लागत
जींद से सोनीपत के बीच की कुल दूरी लगभग 160 किलोमीटर है। रेलवे की गणना के अनुसार, इस हाई-टेक ट्रेन को चलाने में प्रति किलोमीटर करीब 500 रुपये का खर्च आ रहा है। यह लागत सिर्फ हाइड्रोजन ईंधन की है, जबकि ट्रेन के रखरखाव (मेंटेनेंस), तकनीकी निगरानी, सुरक्षा घेरे और अन्य ऑन-ग्राउंड परिचालन का खर्च इसमें अलग से जुड़ता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को जींद जंक्शन से इस महत्वाकांक्षी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद से ही यह ट्रेन अपने निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक रोजाना सुबह 7:40 बजे जींद से सोनीपत के लिए रवाना होती है। रेलवे की स्पेशल टेक्निकल टीमें सफर के दौरान ट्रेन की गति, ईंधन क्षमता, सुरक्षा मानकों और ब्रेक सिस्टम का लगातार विश्लेषण कर रही हैं।
जींद से कम, सोनीपत की ओर से मिल रहे ज्यादा यात्री
हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर शुरुआती दिनों में यात्रियों का प्रतिसाद मिलाजुला रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जींद से सोनीपत की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या प्रतिदिन 50 का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही है। हालांकि, सोनीपत से जींद लौटते वक्त ट्रेन में यात्रियों की संख्या 100 के पार पहुंच जाती है। इसके अलावा जींद और सोनीपत के बीच पड़ने वाले छोटे स्टेशनों पर भी रोजाना 100 से 120 यात्री चढ़ते-उतरते हैं।
इस संबंध में वाणिज्यिक अधीक्षक धीरज बुटानी का कहना है कि चूंकि यह बिल्कुल नई तकनीक की ट्रेन है और लोग अभी इसके समय और किराए से पूरी तरह वाकिफ हो रहे हैं, इसलिए आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी तय है। फिलहाल रेलवे इस रूट पर यात्रियों की आवाजाही बढ़ाने और ट्रेन की दक्षता को बेहतर करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
