Kurukshetra News: पीएम मोदी के जींद दौरे से पहले कुरुक्षेत्र में बवाल, 9 LED प्रचार स्क्रीन पर पथराव
पीएम मोदी के जींद दौरे से पहले कुरुक्षेत्र में बवाल
Kurukshetra News कुरुक्षेत्र। हरियाणा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी जींद दौरे और कुरुक्षेत्र को मिलने वाली एलिवेटेड रेलवे ट्रैक की बड़ी सौगात के जश्न से ठीक पहले, धर्मनगरी का माहौल गरमा गया है। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात कुरुक्षेत्र शहर में एक बेहद सुनियोजित और दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया गया।
प्रधानमंत्री के स्वागत और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के डिजिटल प्रचार के लिए शहर के प्रमुख चौराहों पर स्थापित की गईं 9 विशाल LED स्क्रीन्स को अज्ञात हमलावरों ने पत्थरों और भारी ब्लॉकों से हमला कर पूरी तरह चकनाचूर कर दिया। इस तोड़फोड़ के पीछे किसी निजी रंजिश के बजाय एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक साजिश की बू आ रही है, जिसका मकसद सरकार की उपलब्धियों के संदेश को जनता के बीच जाने से रोकना था।
रात 8 बजे शुरू हुआ था हाइड्रोजन ट्रेन का प्रचार, 2 बजे आ धमका बाइक सवारों का गैंग
इस पूरे मामले को संभाल रहे बीजेपी युवा मोर्चा थानेसर के मंडल प्रधान और प्रोजेक्ट हेड विश्वकांत शर्मा ने बताया कि बुधवार रात करीब 8 बजे ही इन स्क्रीन्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जींद कार्यक्रम से जुड़े स्वागत संदेश लाइव किए गए थे।
इन विज्ञापनों में स्थानीय सांसद नवीन जिंदल और पूर्व मंत्री सुभाष सुधा की ओर से कुरुक्षेत्र की जनता के लिए बधाई संदेश के साथ-साथ ‘मोदी का सपना, एलिवेटेड ट्रैक हुआ अपना’ और देश की बहुप्रतीक्षित हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ से जुड़ी जानकारियां दिखाई जा रही थीं। लेकिन यह डिजिटल प्रचार कुछ लोगों को हजम नहीं हुआ। रात करीब 2 से 3 बजे के बीच बाइक पर सवार होकर तीन युवक आए, जिन्होंने पहचान छिपाने के लिए अपने चेहरों को काले कपड़ों से ढका हुआ था।
सिविल अस्पताल से लेकर यूनिवर्सिटी गेट तक तांडव, 96 मॉड्यूल पूरी तरह तबाह
हमलावरों ने अपने तांडव की शुरुआत सिविल अस्पताल के सामने लगी स्क्रीन से की। वहां ताबड़तोड़ ईंट और सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इंटरलॉकिंग ब्लॉक बरसाने के बाद इस गैंग ने थीम पार्क, मोहन नगर, सेक्टर-5, सेक्टर-7, पुलिस लाइन, पिपली चौक सहित कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के दूसरे और तीसरे गेट पर लगी स्क्रीन्स को एक-एक कर निशाना बनाया।
विश्वकांत शर्मा को जब इसकी भनक लगी तो वे रात में ही मौके पर दौड़े, लेकिन तब तक नुकसान किया जा चुका था। सुबह जब टेक्निकल टीम ने ग्राउंड पर जाकर मुआयना किया, तो पाया कि 96 LED मॉड्यूल और पावर सप्लाई सिस्टम पूरी तरह डेड हो चुके हैं। 3 स्क्रीन में तो पत्थरों के प्रभाव से इंटरनल शॉर्ट सर्किट हो गया। रिपेयरिंग, लेबर और नए पार्ट्स का खर्च मिलाकर यह नुकसान 12 से 13 लाख रुपये के बीच बैठ रहा है।
ढाई करोड़ का था बीओटी प्रोजेक्ट, प्रशासन से आरोपियों को दबोचने की मांग
विश्वकांत शर्मा ने तीखा रुख अख्तियार करते हुए कहा, “शहर में सैकड़ों फ्लैक्स और होर्डिंग्स लगे हैं, जिन्हें फाड़ना या नुकसान पहुंचाना आसान नहीं था। इसलिए डिजिटल स्क्रीन्स को निशाना बनाया गया ताकि हाइड्रोजन ट्रेन और एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का ऐतिहासिक संदेश लोगों तक न पहुंचे। पत्थरों की तीव्रता इतनी भयानक थी कि अगर उस वक्त कोई कर्मचारी वहां काम कर रहा होता, तो उसकी जान भी जा सकती थी।
” आपको बता दें कि यह पूरा प्रोजेक्ट करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से ‘बिल्ट, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOT) तर्ज पर लगाया गया है, जिसका कॉन्ट्रैक्ट साल 2030 तक है। पिछले 6 सालों से ये स्क्रीन सुचारू रूप से चल रही थीं और आज तक ऐसी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी। फिलहाल, पुलिस को शिकायत दे दी गई है और पूरे रूट के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर हमलावरों की शिनाख्त की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
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