Kurukshetra Pehowa Highway: ज्योतिसर बस अड्डे पर बढ़ा हादसों का खतरा, घटिया सामग्री से बने स्पीड ब्रेकर दो दिन में उखड़े
श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों की जान आफत में, ज्योतिसर बस अड्डे पर सड़क सुरक्षा पूरी तरह फेल
Kurukshetra Pehowa Highway: ज्योतिसर (पवन शर्मा) कुरुक्षेत्र से पिहोवा को जोड़ने वाले व्यस्त स्टेट हाईवे पर स्थित धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के गांव ज्योतिसर के सामने सड़क सुरक्षा के दावे पूरी तरह हवा हो चुके हैं। इस मार्ग पर चौबीसों घंटे डंपरों, ट्रालों और अन्य भारी वाहनों का रेला लगा रहता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर यहां ढांक के तीन पात वाली स्थिति है।
हैरान करने वाली बात यह है कि बेहद संवेदनशील पॉइंट होने के बावजूद न तो यहां कोई स्थायी स्पीड ब्रेकर बचा है और ना ही रात के सन्नाटे में वाहन चालकों की आंखों को चौंधियाने और उन्हें सचेत करने वाले रोड स्टड रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं। नतीजा यह है कि यह पूरा स्ट्रेच अब एक ‘ब्लैक स्पॉट’ में तब्दील होता जा रहा है, जहां हर पल एक नया हादसा प्रशासनिक व्यवस्था को मुंह चिढ़ाने के लिए तैयार रहता है।
दो बार बने स्पीड ब्रेकर, पर दो दिन भी नहीं झेल पाए भारी वाहनों का बोझ
सड़क सुरक्षा के नियमों के मुताबिक, जहां दुर्घटना की आशंका ज्यादा होती है या वीआईपी कट होते हैं, वहां चालकों की रफ्तार पर लगाम कसने के लिए पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। लेकिन ज्योतिसर बस अड्डे के हालात बयां करते हुए स्थानीय निवासी गौरव राणा ने लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये की कलई खोलकर रख दी।
गौरव ने बताया कि पिछले महज एक साल के भीतर प्रशासन ने लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए दो मर्तबा आनन-फानन में स्पीड ब्रेकर तो बनवाए, मगर ठेकेदारों की नीयत और सामग्री की घटिया गुणवत्ता का आलम यह रहा कि वे ब्रेकर दो से तीन दिन में ही उखड़कर गिट्टियों में तब्दील हो गए। एक हफ्ता बीतते-बीतते तो सड़क ऐसी समतल हो गई जैसे वहां कभी कुछ था ही नहीं। इसके बाद से डंपर और ट्राले इस कट से अंधी रफ्तार में गुजरते हैं।
स्कूली बच्चों और श्रद्धालुओं के सिर पर चौबीसों घंटे मंडराता काल
यह कट इसलिए भी सबसे ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यहीं से ऐतिहासिक ज्योतिसर तीर्थ का रास्ता कटता है, जहां देश-विदेश से रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की उपदेश स्थली के दर्शन करने पहुंचते हैं। इसके अलावा आसपास के आधा दर्जन गांवों के लिंक रोड भी इसी स्टेट हाईवे पर आकर मिलते हैं।
रोज सुबह-शाम स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दूध-सब्जी का काम करने वाले ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर यह हाईवे पार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां छोटी-मोटी टक्करें तो अब रोजमर्रा की बात बन चुकी हैं, लेकिन कई बार ये हादसे इतने बड़े हो जाते हैं कि हंसते-खेलते परिवार पल भर में तबाह हो जाते हैं।
हुकम चंद की मौत को भूले अधिकारी, ग्रामीणों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
हाईवे की इस बदहाली पर बात करते हुए ग्रामीणों का गला आज भी रुंध जाता है, जब वे पिछले साल 31 मई 2025 की उस खौफनाक दोपहर को याद करते हैं। उस दिन गांव के ही हुकम चंद अपनी पत्नी और मासूम बेटी को बाइक पर बिठाकर ज्योतिसर तीर्थ की तरफ मुड़ रहे थे, तभी कुरुक्षेत्र की तरफ से आ रही दो तेज रफ्तार कारों ने उनकी बाइक को बेरहमी से रौंद दिया।
हुकम चंद ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, जबकि उनकी पत्नी और बेटी महीनों अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ती रहीं। ग्रामीणों का कहना है कि उस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन ने जो रस्म अदायगी के लिए ब्रेकर बनाए थे, वे अब सड़क में समा चुके हैं। लोगों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर तुरंत मानकों के अनुसार मजबूत स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर और रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड नहीं लगाए गए, तो वे किसी और की जान जाने का इंतजार नहीं करेंगे और सीधे हाईवे जाम करने को मजबूर होंगे।
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