Mahendragarh News: महेंद्रगढ़ में 9 से 17 अगस्त तक चलेगा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान, वंदे मातरम के 150वें वर्ष में भव्य आयोजनों की तैयारी
महेंद्रगढ़ में 9 से 17 अगस्त तक चलेगा 'हर घर तिरंगा' अभियान, वंदे मातरम के 150वें वर्ष में भव्य आयोजनों की तैयारी
Mahendragarh News: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर को इस बार महेंद्रगढ़ जिले में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष के ऐतिहासिक पड़ाव के उपलक्ष्य में आगामी 9 से 17 अगस्त तक पूरे जिले में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को एक विशाल जन-आंदोलन के रूप में चलाया जाएगा। इसके साथ ही, 14 अगस्त को देश विभाजन की अकल्पनीय यातनाएं सहने वालों की याद में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ भी अत्यंत सादगी और गरिमा के साथ मनाया जाएगा।
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के साथ राज्य स्तरीय समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) तरुण कुमार पावरिया ने गुरुवार को संवाददाताओं को यह जानकारी दी।
तिरंगा यात्राएं, रैलियां और देशभक्ति से सराबोर होंगे शहर-गांव
अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि इस साल का ‘हर घर तिरंगा’ अभियान इसलिए भी खास और भावनात्मक है, क्योंकि यह राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने वाले अमर गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित है। अभियान के दौरान जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विशाल तिरंगा यात्राओं का आयोजन होगा।
युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए बाइक, साइकिल और ई-बाइक रैलियां निकाली जाएंगी। प्रमुख चौराहों, सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों को तिरंगे रंगों की आकर्षक लाइटिंग से सजाया जाएगा। इसके अलावा, आम जनता के लिए ‘वंदे मातरम’ थीम पर विशेष तिरंगा सेल्फी पॉइंट्स स्थापित किए जाएंगे तथा शैक्षणिक संस्थानों में भारत के राष्ट्रध्वज की विकास यात्रा और इतिहास को दर्शाती प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
14 अगस्त: बिना किसी तड़क-भड़क के याद किया जाएगा विभाजन का दंश
एडीसी पावरिया ने स्पष्ट किया कि 14 अगस्त को आयोजित होने वाले ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का माहौल पूरी तरह सादगी, गंभीरता और संवेदनशीलता से भरा होगा। इस दिन कोई ढोल-नगाड़े या उल्लासपूर्ण कार्यक्रम नहीं होंगे।
समारोह में दो मिनट का मौन रखकर उन लाखों निर्दोषों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाएगी, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाई या बेघर हुए। इस दौरान विभाजन का दंश झेल चुके परिवारों के संस्मरण साझा किए जाएंगे, वृत्तचित्र (लघु फिल्में) दिखाए जाएंगे और शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान व परिचर्चाओं के जरिए नई पीढ़ी को इतिहास की इस मानवीय त्रासदी से अवगत कराया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश मजबूत हो सके।
