July 24, 2026

Narnaul Literary Award: नारनौल के साहित्यकार रघुविन्द्र यादव को ‘लाला देशबंधु गुप्त सम्मान’, सीएम नायब सैनी ने रोहतक में किया सम्मानित

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Narnaul Literary Award: नारनौल के साहित्यकार रघुविन्द्र यादव को 'लाला देशबंधु गुप्त सम्मान', सीएम नायब सैनी ने रोहतक में किया सम्मानित

नारनौल क्षेत्र के इतिहास में पहली बार मिला यह बड़ा सम्मान, नीरपुर के दोहाकार रघुविन्द्र यादव चमके

Narnaul Literary Award: हरियाणा के साहित्यिक परिदृश्य में दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़-नारनौल अंचल का नाम एक बार फिर गर्व से ऊंचा हुआ है। नारनौल के समीपवर्ती गांव नीरपुर के रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार व प्रख्यात दोहाकार रघुविन्द्र यादव को साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के प्रतिष्ठित “लाला देशबंधु गुप्त सम्मान” से अलंकृत किया गया है।

नारनौल और महेंद्रगढ़ क्षेत्र के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी स्थानीय साहित्यकार को इस राज्यस्तरीय सम्मान के लिए चुना गया है। रोहतक स्थित दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (SUPVA) के सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय साहित्यिक पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान यह सम्मान प्रदान किया गया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री और अकादमी के अध्यक्ष नायब सिंह सैनी ने खुद मंच से रघुविन्द्र यादव को शॉल ओढ़ाकर, ताम्रपत्र व प्रशस्ति पत्र सौंपकर और ढाई लाख रुपये (2.50 लाख) का नकद चेक प्रदान कर सम्मानित किया। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें हरियाणा राज्य परिवहन (हरियाणा रोडवेज) की बसों में जीवनभर के लिए निशुल्क सफर की विशेष सुविधा वाला पास भी भेंट किया गया।

25 चर्चित कृतियों के रचयिता हैं रघुविन्द्र, कुरुक्षेत्र विवि में हो चुका है शोध

देश के अग्रगण्य दोहाकारों में शुमार रघुविन्द्र यादव पिछले कई दशकों से लेखन और संपादन के जरिए हिंदी साहित्य की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने छंदशास्त्र, दोहा, लघुकथा, कविता और गज़ल जैसी विविध साहित्यिक विधाओं में अपनी कलम का लोहा मनवाया है।

अब तक उनके चार चर्चित दोहा संग्रह, दो कुंडलिया छंद संग्रह, दो लघुकथा संग्रह, एक कविता संग्रह और एक ग़ज़ल संग्रह समेत कुल 25 पुस्तकें प्रकाशित होकर पाठकों के बीच सराही जा चुकी हैं।

साहित्यिक लेखन के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका योगदान मिसाल रहा है। वे साल 2012 से राष्ट्रीय स्तर की शोध एवं साहित्य पत्रिका “बाबूजी का भारतमित्र” का नियमित प्रकाशन और संपादन कर रहे हैं।

उनकी साहित्यिक उपलब्धियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उनके दोहों में समाहित सामाजिक सरोकारों पर बाकायदा शोध कार्य (Ph.D) संपन्न हो चुका है। इसके अलावा देश के कई नामचीन आलोचकों द्वारा उनके दोहा साहित्य पर समीक्षात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

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