July 18, 2026

Nilokheri HIRD: नीलोखेड़ी ग्रामीण विकास संस्थान में जीआईएस ट्रेनिंग संपन्न, निदेशक डॉ. वीरेंद्र चौहान ने दी डिजिटल सीख

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Nilokheri HIRD: नीलोखेड़ी ग्रामीण विकास संस्थान में जीआईएस ट्रेनिंग संपन्न, निदेशक डॉ. वीरेंद्र चौहान ने दी डिजिटल सीख

नीलोखेड़ी ग्रामीण विकास संस्थान में जीआईएस ट्रेनिंग संपन्न

Nilokheri HIRD: हरियाणा के ग्रामीण अंचल को डिजिटल क्रांति से जोड़ने की दिशा में नीलोखेड़ी स्थित हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान (HIRD) ने एक और ठोस कदम आगे बढ़ाया है। संस्थान में ‘वीबीजी रामजी’ (मनरेगा के नवीन स्वरूप) के तहत ‘युक्तधारा’ पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों की जीआईएस (GIS) आधारित निगरानी विषय पर आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने एक बेहद गंभीर और आत्मीय बात कही। उन्होंने कहा कि हम चाहे जितनी भी तकनीकी तरक्की कर लें, हमें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। भाषा केवल आपस में बातचीत करने का जरिया भर नहीं है, बल्कि यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाने वाली संवाहक भी है। अपनी मातृभाषा का आदर करना हर नागरिक का बुनियादी फर्ज है।

जियो-टैगिंग से रुकेगा भ्रष्टाचार, आएगी पारदर्शिता

समापन सत्र के दौरान डॉ. चौहान ने संस्थान परिसर में खुद पौधारोपण किया और आधुनिक तकनीक का सीधा उदाहरण पेश करते हुए उन पौधों की मौके पर ही जियो-टैगिंग करके दिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘युक्तधारा’ जैसी आधुनिक तकनीक आज के दौर में ग्रामीण विकास के कामों में पारदर्शिता लाने और उनकी गुणवत्ता तय करने का सबसे अचूक हथियार है। जीआईएस आधारित योजना निर्माण और डिजिटल मैपिंग की मदद से अब गांवों के विकास का खाका वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा सकेगा। इससे योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी हेरफेर के समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचेगा।

सोनीपत और हिसार के इंजीनियरों ने सीखे डिजिटल मैपिंग के गुर

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में सोनीपत और हिसार जिलों से आए अतिरिक्त खंड कार्यक्रम अधिकारियों (ABPOs) और जूनियर इंजीनियरों (JEs) ने हिस्सा लिया। ट्रेनिंग के दौरान इन अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों, सरकारी संपत्तियों और पौधारोपण अभियानों की जियो-टैगिंग व डिजिटल मैपिंग का जमीनी पाठ पढ़ाया गया। विशेषज्ञों ने बारीकी से समझाया कि जियो-टैगिंग के जरिए किसी भी सरकारी संपत्ति या पौधे की सटीक भौगोलिक लोकेशन, फोटो और उससे जुड़े तमाम आंकड़े डिजिटल रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। इससे मुख्यालय पर बैठे अधिकारी भी वास्तविक समय (रियल टाइम) में काम की प्रगति और उसकी क्वालिटी की जांच कर सकते हैं, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

हैदराबाद और कुरुक्षेत्र के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मीडिया संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. प्रदीप राय ने तकनीक के दौर में ‘मीडिया साक्षरता’ की अहमियत पर रोशनी डाली ताकि समाज तक सिर्फ सच और भरोसेमंद जानकारियां ही पहुंच सकें। वहीं, हैदराबाद के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) से आए सहायक आचार्य मोहम्मद जफर ने युक्तधारा पोर्टल के जटिल तकनीकी पहलुओं को बेहद सरल तरीके से समझाया। कार्यक्रम के समन्वयक कमलदीप सांगवान ने पूरे कोर्स की रूपरेखा सामने रखी। इस मौके पर अतिरिक्त खंड कार्यक्रम अधिकारी सुंदर, सुषमा, सीमा और राजपाल पूनिया सहित ग्रामीण विकास विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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