July 17, 2026

Karnal Cyber Fraud: करनाल में साइबर ठगों का आतंक, बेटियों की फीस के ₹2.04 लाख वर्क फ्रॉम होम के चक्कर में गंवाए

0
Karnal Cyber Fraud: करनाल में साइबर ठगों का आतंक, बेटियों की फीस के ₹2.04 लाख वर्क फ्रॉम होम के चक्कर में गंवाए

सावधान! बिना ओटीपी और बिना कॉल के दो मिनट में खाली हो गए 2 बैंक खाते

Karnal Cyber Fraud: हरियाणा का सीएम सिटी करनाल इन दिनों साइबर अपराधियों के निशाने पर है। जिले में ऑनलाइन धोखाधड़ी के दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस महकमे के साथ-साथ आम जनता की भी नींद उड़ा दी है। डिजिटल सुरक्षा के तमाम दावों के बीच, शातिर ठगों ने एक युवक को घर बैठे मोटी कमाई का सब्जबाग दिखाकर उसकी मेहनत की गाढ़ी कमाई लूट ली।

वहीं, एक अन्य मामले में तो तकनीक का ऐसा घालमेल देखने को मिला जहां पीड़ित के मोबाइल पर बिना किसी ओटीपी, कॉल या लिंक के ही दो अलग-अलग बैंकों से एक लाख से ज्यादा रुपये गायब हो गए। करनाल साइबर थाना पुलिस ने दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए मुकदमों का जाल बिछा दिया है।

टास्क पूरा करने का खेल: ₹160 का लालच देकर फंसाया ₹2.04 लाख का शिकार

पहली सनसनीखेज वारदात कोहंड गांव के रहने वाले कृष्ण लाल के साथ हुई। शिकायत के मुताबिक, 25 मई को कृष्ण लाल के मोबाइल पर एक अज्ञात वॉट्सएप नंबर से मैसेज आता है। मैसेज करने वाले ने खुद को ‘सनटेक वेब सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ का कर्ताधर्ता बताते हुए घर बैठे डेटा एंट्री के जरिए मोटी कमाई का ऑफर दिया।

शुरुआत में ठगों ने कृष्ण लाल का भरोसा जीतने के लिए उसे कुछ बेहद आसान टास्क दिए और उसके खाते में ₹160 ट्रांसफर कर दिए। इसके तुरंत बाद उसे एक टेलीग्राम लिंक के जरिए ‘अमेजन बी2बी प्रोडक्ट्स’ नामक ग्रुप में शिफ्ट कर दिया गया, जहां ₹100 का अतिरिक्त वेलकम बोनस भी दिया गया।

जब कृष्ण लाल को लगा कि यह काम असली है, तो ग्रुप के कथित मेंटर्स ‘रिया सान्वी’ और ‘विवेक कुमार’ ने बड़ा खेल शुरू किया। विवेक ने उसे ज्यादा मुनाफे वाले ‘इन्वेस्टमेंट प्लान’ का लालच दिया और अलग-अलग यूपीआई आईडी व बैंक खातों में पैसे डलवाने शुरू कर दिए। कृष्ण लाल ने दो दिनों (26 और 27 मई 2026) के भीतर कुल ₹2,04,018.97 ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने यह पूरी रकम लौटाने के बदले ₹99,000 और जमा करने की शर्त रख दी। यहीं पर कृष्ण लाल का माथा ठनका और जब उसने और पैसे देने से मना करते हुए अपनी मूल रकम मांगी, तो ठगों ने साफ इनकार कर दिया।

बेटियों की पढ़ाई के लिए जुटाए थे पैसे, परिवार गहरे सदमे में

इस ठगी ने पीड़ित परिवार को गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है। कृष्ण लाल ने रुआंसे गले से पुलिस को बताया कि उसने पाई-पाई जोड़कर यह ₹2.04 लाख रुपये अपनी दो बेटियों की स्कूल फीस भरने के लिए बैंक में रखे थे। ठगी का शिकार होने के बाद उसने तुरंत केंद्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर 3-4 शिकायतें दर्ज कराईं।

15 जुलाई को स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच में मामला सही पाए जाने के बाद अब करनाल साइबर क्राइम थाने में नियमित केस दर्ज किया गया है। इस हाईटेक ठगी की तफ्तीश सब इंस्पेक्टर मुकेश को सौंपी गई है, जो बैंक खातों के ट्रेल को खंगाल रहे हैं।

बिना ओटीपी और बिना मैसेज, दो मिनट में दो बैंक खाते हुए खाली

साइबर ठगी की दूसरी वारदात और भी ज्यादा चौंकाने वाली है। करनाल के परविंदर सिंह के साथ हुई इस घटना ने नेट बैंकिंग की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 जुलाई की शाम 6:22 बजे परविंदर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) खाते से अचानक ₹80,000 कट गए।

इसके ठीक दो मिनट बाद यानी शाम 6:24 बजे उनके केनरा बैंक खाते से भी ₹22,000 साफ हो गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि ट्रांजेक्शन के वक्त परविंदर के पास न तो कोई ओटीपी आया और न ही तत्काल कोई मैसेज मिला। अगले दिन 13 जुलाई को जब वे बैंक के रूटीन मैसेज देख रहे थे, तब उन्हें पता चला कि उनके दोनों खातों से कुल ₹1.02 लाख उड़ाए जा चुके हैं।

जीरो एफआईआर के जरिए करनाल ट्रांसफर हुआ केस, पुलिस की चेतावनी

परविंदर सिंह ने बिना वक्त गंवाए तुरंत नोडल साइबर क्राइम थाना पंचकूला में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, जहां तकनीकी बारीकियों को देखते हुए तुरंत ‘जीरो एफआईआर’ काटी गई। इसके बाद सीसीटीएनएस (CCTNS) सिस्टम के जरिए इस केस को करनाल साइबर थाने में ट्रांसफर किया गया है, जहां सब इंस्पेक्टर कृष्ण ने मामले की कमान संभाल ली है।

करनाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों में जिन बैंक खातों और यूपीआई आईडी का इस्तेमाल हुआ है, उन्हें फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही जनता से अपील की गई है कि वे पार्ट-टाइम जॉब, यूट्यूब वीडियो लाइक करने या टेलीग्राम पर निवेश के नाम पर आने वाले किसी भी झांसे में न आएं। अगर किसी के साथ ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, तो वे तुरंत गोल्डन ऑवर (शुरुआती 1 घंटे) के भीतर 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।

यह भी पढ़ें–पानीपत में नाबालिग से दरिंदगी, तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंची मां तो खुला प्रेगनेंसी का राज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed