Nilokheri News: नीलोखेड़ी में स्कूल बसों पर चला प्रशासन का हंटर, 17 बसों में मिलीं खामियां, ₹43 हजार का काटा चालान
नीलोखेड़ी में स्कूल बसों पर प्रशासन की सख्ती, 17 बसों में मिलीं कमियां, ₹43 हजार के चालान
Nilokheri News: अमूमम देखा जाता है कि हादसों के बाद ही प्रशासनिक अमला जागता है, लेकिन नीलोखेड़ी में इस बार प्रशासन ने पहले ही मोर्चा संभाल लिया है। स्कूली बच्चों के असुरक्षित सफर पर अंकुश लगाने के लिए बुधवार को उपमंडल अधिकारी (नागरिक) के निर्देश पर गठित स्कूल वाहन समिति ने रास्तों पर उतरकर कड़ा रुख अख्तियार किया। सुबह जैसे ही स्कूल बसों का पहिया घूमा, प्रशासन की टीमों ने विभिन्न चौराहों पर नाकेबंदी कर बसों को रोकना शुरू कर दिया। इस औचक निरीक्षण के चलते स्कूल प्रबंधकों और बस चालकों में हड़कंप मच गया। टीम ने एक के बाद एक 17 बसों को जांच के दायरे में लिया और उनमें पाई गई खामियों पर तगड़ा एक्शन लिया।
कहीं फायर एक्सटिंग्विशर नदारद, तो कहीं नियमों को ठेंगा
निरीक्षण के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे वाकई चिंताजनक हैं। कई नामचीन स्कूलों की बसों में प्राथमिक चिकित्सा किट (First-Aid Box) खाली पड़ी थीं, तो कुछ में आग बुझाने वाले सिलेंडर या तो एक्सपायर्ड थे या थे ही नहीं। कुछ गाड़ियों के आवश्यक दस्तावेज और चालकों के लाइसेंस में भी तकनीकी कमियां पाई गईं। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर दौड़ रही इन 17 बसों के खिलाफ परिवहन नियमों के तहत कुल ₹43,000 के ऑनलाइन चालान मौके पर ही जनरेट किए गए। जांच दल ने बस चालकों और मौके पर मौजूद स्कूल स्टाफ को कड़ी फटकार लगाते हुए सभी कमियों को तुरंत दुरुस्त करने की अंतिम मोहलत दी है।
सुरक्षा से समझौता नहीं, लापरवाही पर रद्द होगी बसों की परमिट
कार्रवाई की पुष्टि करते हुए स्कूल वाहन समिति के अधिकारियों ने साफ किया कि मासूम स्कूली बच्चों की जिंदगी की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी स्तर पर बरती गई ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समिति ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई महज एक दिन की औपचारिकता नहीं है; आने वाले दिनों में भी इस तरह के औचक निरीक्षण का सिलसिला पूरी सघनता से जारी रहेगा। यदि कोई स्कूल प्रबंधन दोबारा नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ गाड़ी को जब्त करने और स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की दो टूक: स्कूल प्रबंधन खुद संभालें जिम्मेदारी
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल की उम्मीद में स्कूलों के भरोसे छोड़ते हैं। ऐसे में स्कूल प्रबंधन की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी बसों की फिटनेस, स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी कैमरों और ड्राइवरों के वेरिफिकेशन को समय-समय पर खुद जांचें। प्रशासन ने सभी निजी शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे कागजी खानापूर्ति से बाहर निकलकर धरातल पर बच्चों के सफर को महफूज बनाएं, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय हादसे की आशंका को जड़ से खत्म किया जा सके।
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