Panchkula News: 4.20 करोड़ की जमीन का फर्जीवाड़ा! हरियाणा ACB ने तहसीलदार विक्रम सिंगला को फिर किया गिरफ्तार
पंचकूला में पर्ल्स ग्रुप की जमीन पर चला फर्जीवाड़े का खेल, ACB ने तहसीलदार को दोबारा दबोचा
Panchkula News: हरियाणा में बहुचर्चित पर्ल्स ग्रुप (PACL) की जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। विजिलेंस टीम ने रायपुर रानी के तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तारी के बाद टीम ने सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल में उनका मेडिकल कराया, जिसके बाद उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड की मांग की जा रही है। बता दें कि इससे पहले 31 जनवरी को भी विजिलेंस ने उन्हें चंडीगढ़ स्थित आवास से गिरफ्तार किया था, जहां से बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। हालांकि अब नए सबूतों और तथ्यों के सामने आने के बाद यह शिकंजा दोबारा कसा गया है।
लोढ़ा कमेटी से अटैच जमीन का ऐसे रचा गया खेल
मामले की तहकीकात में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पर्ल्स ग्रुप धोखाधड़ी के शिकार लाखों निवेशकों के पैसे लौटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लोढ़ा और सेन कमेटियों का गठन किया गया था। इन कमेटियों ने समूह की संपत्तियों को अटैच कर दिया था। रायपुर रानी तहसील के राजस्व रिकॉर्ड में साल 2016 और 2019 में ही इस जमीन की बिक्री व किसी भी तरह के ट्रांसफर पर पूरी तरह पाबंदी की रपट दर्ज थी। इसके बावजूद आरोपी अधिकारियों ने आपस में सांठगांठ कर फर्जीवाड़े का पूरा ताना-बाना बुन डाला।
जीपीए के सहारे हटाया स्टे, दनादन कर दीं दो रजिस्ट्रियां
जांच के अनुसार, फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) निवासी सुरमुख सिंह की जीपीए के आधार पर जीपीए धारकों ने राजस्व रिकॉर्ड से बन्दी आदेश (स्टे) हटवाने की फर्जी प्रक्रिया शुरू की।
इसमें पटवारी नरेंद्र कुमार और तहसीलदार विक्रम सिंगला ने मिलीभगत दिखाते हुए 22 दिसंबर 2025 को रिकॉर्ड से स्टे हटा दिया। इसके बाद कानूनगो दीपक कुमार ने बिना किसी कानूनी अधिकार के इस फर्जी प्रक्रिया की तस्दीक कर दी। इसके ठीक बाद, 2 जनवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 के जरिए कुल 17.55 एकड़ जमीन कुनाल छिलाना और सौरभ नामक व्यक्तियों को 4.20 करोड़ रुपये में बेच दी गई। मामला यहीं नहीं रुका, 9 जनवरी को इंतकाल दर्ज कर 17 जनवरी को इसे आनन-फानन में मंजूर भी कर लिया गया।
एसडीएम के नोटिस और शिकायतकर्ता की अर्जी को भी ठेंगा दिखाया
इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अधिकारियों को सब कुछ मालूम था। एसडीएम पंचकूला ने इस तरह के प्रार्थना पत्रों पर गलत तरीके से आदेश देने को लेकर तहसीलदार से बाकायदा लिखित स्पष्टीकरण मांगा था।
उधर, हिसार निवासी शिकायतकर्ता मंदीप काजला ने भी अधिकारियों से गुहार लगाई थी कि पर्ल्स ग्रुप की इस विवादित जमीन की रजिस्ट्री न की जाए। लेकिन कथित तौर पर भारी मुनाफे और लेन-देन के चक्कर में इन तमाम चेतावनियों और नियमों को ताक पर रखकर पूरी वारदात को अंजाम दिया गया।
