Rashmika Mandanna Success Story: जब 25 ऑडिशन में रिजेक्ट हुईं रश्मिका, मेकर्स बोले- एक्ट्रेस जैसा चेहरा नहीं है
'चेहरा एक्ट्रेस जैसा नहीं है...' के तंज से लेकर पैन इंडिया स्टार बनने तक, संघर्षों से तपी रश्मिका मंदाना की कहानी
Rashmika Mandanna Success Story: सिनेमा की चकाचौंध में आज रश्मिका मंदाना जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने का रास्ता कांटों भरा रहा है। ‘पुष्पा’, ‘एनिमल’ और आगामी फिल्म ‘छावा’ के जरिए करोड़ों दिलों पर राज करने वाली रश्मिका को कभी फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे से यह कहकर लौटा दिया जाता था कि उनका चेहरा किसी हीरोइन जैसा नहीं दिखता।
एक-दो नहीं, बल्कि करीब 20 से 25 ऑडिशंस में लगातार मिले रिजेक्शन ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था। वे घर लौटकर घंटों रोया करती थीं, लेकिन इरादों की पक्की रश्मिका ने हिम्मत नहीं हारी। कड़े संघर्ष के बाद जब उन्हें कन्नड़ फिल्म ‘किरिक पार्टी’ मिली, तो उन्होंने पहली ही फिल्म से यह साबित कर दिया कि हुनर को किसी तय ढांचे में नहीं बांधा जा सकता।
कॉफी बागानों के बीच बीता बचपन, झेला भारी आर्थिक संकट
रश्मिका मंदाना का जन्म 5 अप्रैल 1996 को कर्नाटक के खूबसूरत हिल स्टेशन कोडागु (कूर्ग) के वीराजपेट में हुआ था। वे पारंपरिक कोडवा समुदाय से आती हैं और इस समाज से फिल्मों में आने वाली वे पहली अभिनेत्री हैं, जिसके चलते शुरुआत में उन्हें रूढ़िवादी लोगों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी।
आज भले ही उनके पिता मदन मंदाना कूर्ग में एक सफल कॉफी एस्टेट और फंक्शन हॉल के मालिक हैं, लेकिन रश्मिका का बचपन बेहद तंगहाली में बीता। एक समय ऐसा था जब उनके माता-पिता के पास घर का किराया देने तक के पैसे नहीं होते थे। रश्मिका बताती हैं कि गरीबी का आलम यह था कि माता-पिता उनके लिए खिलौने तक नहीं खरीद पाते थे, यही वजह है कि वे आज भी पैसों की अहमियत अच्छे से समझती हैं।
हॉस्टल की बंदिशें और तीन विषयों में ग्रेजुएशन
माता-पिता जब आर्थिक और पारिवारिक स्थितियों को संभालने में जूझ रहे थे, तब रश्मिका का दाखिला कूर्ग पब्लिक स्कूल (गोनिकोप्पल) के बोर्डिंग में करा दिया गया। जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा हॉस्टल की चारदीवारी में बीता, जहां फिल्मों का नामोनिशान नहीं था। रात को सिर्फ कुछ देर के लिए टीवी पर न्यूज या स्पोर्ट्स देखने की इजाजत मिलती थी। स्कूल के दिनों में बैकबेंचर रहीं रश्मिका का मन पढ़ाई से ज्यादा भरतनाट्यम और डांस में रमता था। हालांकि, उन्होंने शिक्षा के मोर्चे पर भी खुद को साबित किया। बेंगलुरु के मशहूर एम.एस. रामैया कॉलेज से उन्होंने अंग्रेजी साहित्य (English Literature), मनोविज्ञान (Psychology) और पत्रकारिता (Journalism) जैसे तीन अलग-अलग विषयों में स्नातक की डिग्री हासिल की।
किस्मत ने पलटी बाजी: जब प्रोफेसर ने दिया ऑडिशन का हौसला
रश्मिका ने कभी अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखा था, लेकिन साल 2014 में कॉलेज के दौरान उन्होंने ‘क्लीन एंड क्लियर टाइम्स फ्रेश फेस’ प्रतियोगिता जीती। इसके बाद मॉडलिंग के ऑफर आने लगे। जब शुरुआती दौर में लगातार रिजेक्शन मिल रहे थे, तो एक फिल्म के लिए उन्होंने तीन महीने तक कड़ी ट्रेनिंग भी ली, लेकिन वह फिल्म फ्लोर पर आने से पहले ही बंद हो गई।
हताश होकर जब रश्मिका घर लौट आईं और उनके माता-पिता ने उन्हें वापस बुला लिया, तब कॉलेज के एक प्रोफेसर ने उन्हें दोबारा कोशिश करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद मिली ‘किरिक पार्टी’ ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। शुरुआती रिजेक्शंस ने रश्मिका को टूटना नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में आगे बढ़ना सिखाया, जिसका नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है।
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