Yamunanagar News: (संजीव चौहान) यमुनानगर के पुराना हमीदा इलाके में हुए सनसनीखेज मेहंदी हसन हत्याकांड के बाद से ही स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार में कानून-व्यवस्था को लेकर गहरा असंतोष है। मंगलवार को यह आक्रोश उस समय खुलकर सामने आ गया जब हमीदा क्षेत्र के दर्जनों लोग न्याय की मांग को लेकर सीधे जिला सचिवालय जा पहुंचे। मृतक के परिजनों ने जिला उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से पुलिस प्रशासन को एक मांग पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी में बरती जा रही ढिलाई के चलते पूरा परिवार इस समय खौफ के साए में जीने को मजबूर है।
बीएनएस की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज, फिर भी पुलिस के हाथ खाली
मृतक के भाई जब्बार हसन ने मीडिया को बताया कि शहर यमुनानगर थाने में इस वारदात को लेकर छह नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा संख्या 0321/2026 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) [हत्या] के तहत दर्ज है। जब्बार का आरोप है कि इतनी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने और घटना को कई दिन गुजर जाने के बाद भी कुछ मुख्य आरोपी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। उन्होंने बताया कि मेहंदी हसन पर लोहे की गंडासी, भारी रॉड, पाटला और ईंट-डंडों से बेरहमी से हमला किया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले मेहंदी हसन पर हुआ यह हमला कोई अचानक उपजा विवाद नहीं, बल्कि सोच-समझकर रची गई एक खूनी साजिश का हिस्सा था।
‘जैसा हाल मेहंदी का किया, वैसा तुम्हारा करेंगे’
पीड़ित परिवार ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनका कहना है कि जो आरोपी अभी बाहर घूम रहे हैं, वे और उनके गुर्गे अब केस को कमजोर करने के लिए गवाहों और परिजनों को डरा-धमका रहे हैं। परिजनों को सरेआम धमकियां दी जा रही हैं कि जिस तरह मेहंदी हसन को तड़पाकर मौत के घाट उतारा गया, ठीक उसी तरह पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। इस खौफनाक माहौल की वजह से परिवार का घर से निकलना तक दूभर हो गया है।
पुलिसिया जांच और सुस्त रवैये पर खड़े किए सवाल
जब्बार हसन ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी परिवार के सदस्य इस मामले की प्रगति जानने के लिए जांच अधिकारी (IO) से संपर्क करते हैं, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। टालमटोल वाले इस रवैये से अपराधियों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं। हमीदा क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक (SP) से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और गवाहों की सुरक्षा पुख्ता करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि पुलिस ने जल्द ही अपनी सुस्ती नहीं त्यागी, तो न्याय की इस लड़ाई को सड़कों पर ले जाया जाएगा और एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

