Yamunanagar News: सनातन धर्म मंदिर कमेटी पर गंभीर आरोप, जिमखाना क्लब में खुली पोल
यमुनानगर में मंदिर प्रबंधन पर बवाल
Yamunanagar News: धर्म और आस्था के केंद्रों में प्रबंधन को लेकर उठने वाले विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अयोध्या राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी के मामले की गूंज के बीच अब यमुनानगर के पॉश इलाके मॉडल टाउन स्थित ऐतिहासिक श्री सनातन धर्म मंदिर का प्रबंधन विवादों के घेरे में आ गया है। ‘श्री सनातन धर्म मंदिर संघर्ष समिति’ ने मंदिर की मौजूदा कार्यकारिणी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
समिति का आरोप है कि मौजूदा कमेटी मंदिर की स्थापना के समय बने मूल संविधान की धज्जियां उड़ा रही है और आय-व्यय के लेन-देन में भारी पारदर्शिता का अभाव है। शुक्रवार को शहर के जिमखाना क्लब में आयोजित एक तीखी प्रेसवार्ता के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने इस पूरे मामले की सरकार से उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की गुहार लगाई।
100 सदस्यों से सिमटकर तीन परिवारों की जागीर बनी सभा: संघर्ष समिति
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के अध्यक्ष विरेंद्र आजमानी, महासचिव मनीष मलिक, सुरेंद्र नंदा, सुभाष वोहरा और विनोद मरवाह ने मंदिर के इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि शहरवासियों की अपार श्रद्धा को देखते हुए वर्ष 1956 में इस मंदिर की नींव रखी गई थी। शुरुआती दौर में मंदिर सभा में 100 प्रतिष्ठित सदस्य थे और लोकतांत्रिक तरीके से फैसले होते थे। लेकिन साल 2002 के चुनावों में एक सोची-समझी साजिश के तहत धांधली की गई और तब से नियमों को तोड़ना शुरू हुआ।
समिति के पदाधिकारियों ने चौंकाने वाला दावा किया कि आज इस ऐतिहासिक मंदिर सभा में कुल जमा 40 सदस्य रह गए हैं, जिनमें से भी केवल 30 को ही वोट देने का अधिकार है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन सदस्यों में से 19 सदस्य केवल तीन ही परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। समिति का सीधा आरोप है कि लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म कर मंदिर को पारिवारिक जागीर बना दिया गया है।
स्कूल को निजी संस्था बनाने और दुकानों के आवंटन पर उठाए सवाल
श्री सनातन धर्म सभा के पूर्व उप-प्रधान विपिन मेहता और पूर्व पदाधिकारी अश्वनी नंदा ने प्रेस के सामने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंदिर के मूल संविधान के तहत जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए एक स्कूल की स्थापना की गई थी, जिसका संचालन पूरी तरह मंदिर सभा की देखरेख में होना था।
लेकिन वर्तमान कार्यकारिणी के कुछ रसूखदारों ने मिलीभगत कर उस स्कूल को एक निजी संस्था में तब्दील कर दिया और उस पर अपना व्यक्तिगत नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके अलावा मंदिर परिसर की दुकानों को भी चहेतों और निजी व्यक्तियों को बिना किसी पारदर्शिता के किराए पर दिए जाने और उसका मुनाफा सार्वजनिक न करने के आरोप लगाए गए हैं।
बेबुनियाद हैं आरोप, यह मंदिर पर कब्जे की साजिश: वर्तमान प्रधान
दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों पर मंदिर की वर्तमान कार्यकारिणी ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। श्री सनातन धर्म मंदिर सभा के मौजूदा प्रधान विजय मेहता ने संघर्ष समिति के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “जो लोग आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं, उनका धर्म या समाज सेवा से कोई लेना-देना नहीं है।
वे केवल इस प्रतिष्ठित मंदिर पर अवैध रूप से कब्जा करना चाहते हैं।” विजय मेहता ने साफ किया कि कमेटी के पास हर एक पैसे का हिसाब सुरक्षित है और इन सभी अनर्गल आरोपों का कानूनी तौर पर करारा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इसे मंदिर की साख को बट्टा लगाने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया।
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