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Nuh Medical College,: नूंह मेडिकल कॉलेज में हड़कंप: डॉक्टर पी रहे थे बंदरों की लाशों वाला पानी, छत की टंकी में मिले 3 शव

AAmandeep Singh
नूंह मेडिकल कॉलेज में हड़कंप: डॉक्टर पी रहे थे बंदरों की लाशों वाला पानी, छत की टंकी में मिले 3 शव
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नूंह। स्वास्थ्य के पहरेदार खुद ही सरकारी सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गए हैं। नूंह स्थित शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एक ऐसा वाकया सामने आया है जिसने स्वच्छता और प्रबंधन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। रेजिडेंशियल डॉक्टर एरिया की एक इमारत की छत पर रखे मुख्य वाटर टैंक में तीन बंदर मृत पाए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह टैंक उन पाइपलाइनों से सीधे जुड़ा था, जो परिसर की तीन प्रमुख आवासीय इमारतों में पानी पहुंचाती हैं। यानी, पिछले कई दिनों से यहां रहने वाले डॉक्टर और उनके मासूम बच्चे उसी पानी का सेवन कर रहे थे, जिसमें बंदरों के शव सड़ रहे थे।

बदबू फैली तो खुला राज, सदमे में डॉक्टर और परिवार

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इस गंभीर लापरवाही का खुलासा तब हुआ जब नलों से आने वाले पानी में अजीब सी दुर्गंध आने लगी। जब छत पर जाकर वाटर टैंक की जांच की गई, तो वहां का नजारा देखकर कर्मचारियों के होश उड़ गए। पानी के अंदर तीन बंदरों के शव पूरी तरह गल चुके थे। आशंका जताई जा रही है कि ये बंदर काफी समय पहले टैंक में गिरे होंगे, लेकिन किसी ने रूटीन चेकिंग तक करने की जहमत नहीं उठाई। जैसे ही यह खबर हॉस्टल और रेजिडेंशियल ब्लॉक में फैली, वहां रह रहे डॉक्टरों के परिवारों में हड़कंप मच गया। कई लोगों ने पेट संबंधी संक्रमण और बीमारियों के डर से तुरंत डॉक्टरों से सलाह लेना शुरू कर दिया है।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर उठे सवाल: क्या यही है सुरक्षा?

एक मेडिकल कॉलेज, जहां स्वच्छता और स्टरलाइजेशन (Sterilization) के कड़े प्रोटोकॉल होने चाहिए, वहां पेयजल व्यवस्था को लेकर इतनी बड़ी ढिलाई समझ से परे है। डॉक्टरों ने रोष जताते हुए कहा कि जिस संस्थान में वे दूसरों का इलाज करते हैं, वहां उनके अपने परिवार की जान जोखिम में डाल दी गई। रेजिडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि मेंटेनेंस विभाग और संबंधित ठेकेदार नियमित रूप से टंकियों की सफाई और उनके ढक्कनों की जांच नहीं करते। उन्होंने मांग की है कि केवल सफाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए जिन्होंने इस तरफ आंखें मूंद रखी थीं।

सप्लाई बंद, अब पूरे सिस्टम के शुद्धिकरण की कवायद

मामला उजागर होते ही अस्पताल प्रशासन बचाव की मुद्रा में आ गया है। संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया और एहतियात के तौर पर तीनों इमारतों की पानी की सप्लाई फिलहाल बंद कर दी गई है। टैंकों को खाली कर उन्हें क्लोरीन और अन्य रसायनों से साफ करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों और डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल एक बार की सफाई का मामला नहीं है, बल्कि पूरे वाटर सप्लाई नेटवर्क के पाइपों को साफ करने की जरूरत है, क्योंकि दूषित पानी लंबे समय तक इनमें दौड़ता रहा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी संस्थानों में निगरानी के अभाव में विकास के दावे कितने खोखले हो सकते हैं।

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