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Nuh Suicide Case: नूंह में गैंगरेप के बाद युवती की खुदकुशी का मामला गरमाया, सर्व समाज ने सरकार को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम

AAmandeep Singh
Nuh Suicide Case: नूंह में गैंगरेप के बाद युवती की खुदकुशी का मामला गरमाया, सर्व समाज ने सरकार को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम
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नूंह। हरियाणा का नूंह जिला एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह प्रशासनिक नाकामी और एक बेटी को इंसाफ दिलाने की सामूहिक हुंकार है। थाना बिछोर क्षेत्र में एक युवती के साथ कथित गैंगरेप और उसके बाद उसकी खुदकुशी के मामले ने पूरे सूबे को झकझोर कर रख दिया है। घटना को करीब 15 दिन बीत जाने के बाद भी जब जिला पुलिस की तफ्तीश किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची, तो बुधवार को सर्व समाज के बैनर तले हजारों लोग नूंह की अनाज मंडी में इकट्ठा हुए। बैठक में न केवल पुलिसिया सुस्ती पर तीखे सवाल उठाए गए, बल्कि इसके बाद कलेक्ट्रेट तक एक विशाल पैदल मार्च निकालकर उपायुक्त (DC) को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।

वीडियो के जरिए घिनौना खेल: ब्लैकमेलिंग की प्रताड़ना ने छीन ली मासूम की जिंदगी

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प्रदर्शनकारियों और पीड़ित परिवार ने जो आरोप लगाए हैं, वे कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी हैं। परिजनों के मुताबिक, बीती 18 मई को दरिंदों ने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; आरोपियों ने इस कृत्य की अश्लील वीडियो भी बना ली। इसके बाद पीड़िता को लगातार सामाजिक बदनामी का खौफ दिखाकर ब्लैकमेल किया जाने लगा। इसी मानसिक प्रताड़ना और गहरे सदमे को न झेल पाने के कारण आखिरकार युवती ने आत्मघाती कदम उठा लिया। हालांकि पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन अब तक किसी भी नामजद आरोपी की सलाखों के पीछे न होना व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है।

तीन दिन का अल्टीमेटम; दिल्ली-चंडीगढ़ घेरने की तैयारी

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एडवोकेट गुलाम नबी आजाद ने प्रशासनिक उदासीनता पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा,

“हम शांतिपूर्ण तरीके से लगातार पुलिस कप्तानों और प्रशासनिक चौखटों पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हमें सिर्फ खोखले आश्वासन मिल रहे हैं। अब सर्व समाज के सब्र का बांध टूट चुका है। हमने सरकार को केवल तीन दिन का वक्त दिया है। अगर तय समय में आरोपी नहीं दबोचे गए, तो यह आंदोलन नूंह की सीमाओं को लांघकर दिल्ली के जंतर-मंतर और चंडीगढ़ में आला हुक्मरानों के दफ्तरों तक पहुंचेगा।”

वहीं, मेवात के सामाजिक ताने-बाने का जिक्र करते हुए मास्टर रफीक ने कहा कि यह लड़ाई अब किसी एक मजहब या परिवार की नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे मेवात की आन-बान-शान और बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा सामूहिक विषय है।

राजनैतिक रंग पकड़ रहा मामला, भाजपा महिला मोर्चा ने भी सुर में मिलाया सुर

जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, नूंह की इस घटना को लेकर सियासी पारा भी चढ़ने लगा है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर पूरी तरह हमलावर है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस इंसाफ की लड़ाई में सत्ताधारी दल की स्थानीय इकाइयां भी पीछे नहीं हैं। प्रदर्शन में शामिल हुईं भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष गोल्डी शर्मा ने कहा कि ऐसी दरिंदगी समाज के माथे पर कलंक है। उन्होंने मांग की कि पुलिस बिना किसी राजनैतिक या सामाजिक दबाव के इन अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए ताकि मेवात में एक नजीर पेश की जा सके।

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