Tallest Ravana India: शारदीय नवरात्रों की धूम के बीच अब बाजारों से लेकर मैदानों तक विजयदशमी यानी दशहरे के पर्व की तैयारियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं. इस बार का दशहरा उत्सव देशवासियों के लिए बेहद खास रहने वाला है, (Tallest Ravana India) क्योंकि इस बार हरियाणा के पंचकूला और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का द्वारका इलाका सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है.
इन दोनों ही प्रमुख स्थानों पर इस बार देश और दुनिया के सबसे अधिक ऊंचाई वाले 221 फीट के रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा, जिन्हें देखने के लिए भारी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है.
अंबाला के तेजिंदर चौहान और उनकी टीम का अनोखा करिश्मा
इन गगनचुंबी और भव्य पुतलों को किसी आम कारीगर ने नहीं, बल्कि अंबाला के बराड़ा के रहने वाले मशहूर शिल्पकार तेजिंदर सिंह चौहान ने अपनी कुशल टीम के साथ मिलकर तैयार किया है. मीडिया से बातचीत के दौरान तेजिंदर सिंह चौहान ने इन पुतलों की निर्माण प्रक्रिया और खासियतों के बारे में खुलकर चर्चा की. उन्होंने बताया कि (Panchkula Sector 5 Dussehra 2026) हरियाणा के पंचकूला स्थित सेक्टर-5 के शालीमार ग्राउंड और दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में एकसमान 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले खड़े किए गए हैं.
पंचकूला के शालीमार ग्राउंड में इन पुतलों को खड़ा करने के लिए करीब 100 वॉलंटियर्स ने जी-तोड़ मेहनत की और शनिवार देर शाम दो बड़ी क्रेन व एक जेसीबी की मदद से इसे सुरक्षित तरीके से जमीन में खड़े किया गया.
साढ़े तीन महीने की मेहनत और 34 लाख की लागत
पंचकूला में तैयार किए गए इस विशालकाय रावण के पुतले को बनाने में लगभग साढ़े तीन महीने का लंबा वक्त लगा है और इस पर करीब 34 लाख रुपये की लागत आई है. इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च रामलीला आयोजक कमेटी और श्री माता मनसा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा उठाया गया है. पुतले के आंकड़ों पर गौर करें तो इसका कुल वजन लगभग 10 से 12 टन के बीच है.
इसकी विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रावण के जूते ही 40 फीट लंबे और 7 फीट ऊंचे हैं, जबकि उसके हाथ की तलवार की लंबाई 50 फीट है. इसके अलावा ठोड़ी से माथे तक रावण का चेहरा 25 फीट का है और चार हिस्सों में तैयार किए गए मुकुट की अपनी ऊंचाई 30 फीट है, जो पीछे लगी रोप के साथ कुल 55 फीट तक पहुंच जाती है.
मजबूती और सुरक्षा को दी गई है पहली प्राथमिकता
इस भव्य पुतले को मजबूती देने के लिए इसमें भारी मात्रा में सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. तेजिंदर सिंह चौहान ने बताया कि इसमें करीब 7 टन शुद्ध लोहे के ढांचे के साथ 700 मजबूत बांस लगाए गए हैं. वहीं, रावण की पूरी पोशाक को तैयार करने के लिए वेलवेट के करीब चार हजार मीटर कपड़े का उपयोग किया गया है.
सुरक्षा के पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि वह इससे भी ज्यादा ऊंचाई का पुतला बना सकते थे, लेकिन दर्शकों की सुरक्षा सर्वोपरि है. शालीमार ग्राउंड के क्षेत्रफल को ध्यान में रखते हुए ही इसकी ऊंचाई 221 फीट तय की गई है (Dwarka Delhi Ravana effigy) ताकि दहन के दौरान किसी तरह का जोखिम न रहे. इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड के देहरादून में भी 181 फीट ऊंचा एक अन्य पुतला तैयार किया है.
छह बार गिनीज बुक में दर्ज हो चुका है नाम
रावण के सबसे ऊंचे पुतले बनाने की कला में सिद्धहस्त तेजिंदर सिंह चौहान का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उनका नाम विभिन्न श्रेणियों में छह बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है.
उन्होंने याद करते हुए बताया कि उन्होंने सबसे पहले साल 1985 में 200 फीट का रावण का पुतला बनाया था, (tallest ravana in world) जिसके बाद से यह सिलसिला लगातार बढ़ता गया. साल 2026 के इस सीजन में पंचकूला और दिल्ली में खड़े किए गए ये 221 फीट के पुतले कला और इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना पेश कर रहे हैं, जो दशहरे के इस पर्व को और भी ज्यादा ऐतिहासिक बना देंगे.
यह भी पढ़ें–Haryana Weather Update: हरियाणा में बदल रहा मौसम का मिजाज, जानिए 22 अक्टूबर तक कैसा रहेगा आपके शहर का हाल

