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Pithori Amavasya: पिठोरी अमावस्या आज, संतान की लंबी उम्र के लिए ऐसे करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और आसान उपाय

Pithori Amavasya: पिठोरी अमावस्या आज, संतान की लंबी उम्र के लिए ऐसे करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और आसान उपाय

पिठोरी अमावस्या आज, संतान की लंबी उम्र के लिए ऐसे करें पूजा

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GGaganpreet Kaur

Pithori Amavasya: सनातन धर्म में भाद्रपद मास की अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है, जिसे लोक परंपरा में ‘पिठोरी अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 10 सितंबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार यह दिन दो मुख्य कारणों से अत्यंत फलदायी माना गया है—पहला, पितरों के निमित्त किया जाने वाला तर्पण व पिंडदान और दूसरा, माताओं द्वारा अपनी संतान के मंगल-कामना के लिए किया जाने वाला निर्जला व्रत।

ज्योतिष शास्त्र और पंचांग की गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से प्रारंभ हो चुकी है, जो अगले दिन यानी 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे समाप्त होगी।

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शाम को प्रदोष काल में पूजा का विशेष मुहूर्त

शास्त्रों में पिठोरी अमावस्या की पूजा के लिए प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के समय को सबसे उपयुक्त माना गया है। इस दिन शाम 06:39 बजे से लेकर रात 08:57 बजे के बीच पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ रहेगा।

मान्यता है कि इस शुभ समय में की गई पूजा और उपाय सीधे देवियों और पितरों तक पहुंचते हैं। यही वजह है कि शाम के वक्त घरों और मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

पितृ दोष निवारण के लिए करें ये अचूक उपाय

पिठोरी अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष उपाय बताए गए हैं:

जल अर्पण और तर्पण: तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें कुशा और काले तिल मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का ध्यान करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।

मुख्य द्वार और पीपल पर दीपदान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और पास के किसी पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाकर पितरों से जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।

पशु-पक्षियों की सेवा: इस दिन पहली रोटी पर थोड़ा सा गुड़ रखकर गाय को खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही छत या आंगन में कौवों और पक्षियों के लिए अन्न-पानी का प्रबंध करें।

दान-पुण्य: अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज, वस्त्र या छाते का दान करें।

क्या है पिठोरी अमावस्या की पौराणिक कथा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माताएं प्रदोष काल में भगवती दुर्गा के साथ-साथ 64 योगिनी देवियों की आटे से बनी आकृतियां (पीठ) बनाकर उनकी पूजा करती हैं। इसी ‘पीठ’ या आटे के प्रयोग के कारण इसे पिठोरी अमावस्या कहा जाता है।

कथाओं में उल्लेख मिलता है कि इस व्रत के प्रभाव से मृत संतानों तक को जीवनदान मिला था और निःसंतान दंपत्तियों को गुणवान संतान की प्राप्ति हुई थी। यही कारण है कि सदियों से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, निरोगी काया और उज्ज्वल भविष्य के लिए यह व्रत पूरे नियम-संयम से रखती आ रही हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। जग मार्ग किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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