Punjab politics: पंजाब की राजनीति में अकाली दल के भीतर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा जल्द ही परिवार सहित शिरोमणि अकाली दल (बादल) में शामिल होंगे। एक दिन पहले ही उन्होंने अकाली दल पुनर सुरजीत से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद उन्होंने पंजाब और पंथ के हितों की रक्षा के लिए सभी अकाली और पंथक संगठनों को एक मंच पर लाने की अपील की थी। पत्रकारों से बातचीत में प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल पंजाब और पंथ की नुमाइंदगी करने वाली जमात है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा पंजाब के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक हालात में प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी भूमिका न निभा पाने का उन्हें दुख है। उन्होंने कहा कि सरकार के जनविरोधी और पंजाब विरोधी फैसलों के खिलाफ एक सक्रिय राजनीतिक आंदोलन की कमी महसूस हो रही है। उनके मुताबिक, पंजाब के मुद्दों पर मजबूत आवाज उठाने के लिए अकाली और पंथक संगठनों के बीच एकजुटता जरूरी है।
अकाली दल के अलग-अलग धड़ों में बंटने से विरोधी ताकतों को फायदा
प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि अकाली दल के अलग-अलग धड़ों में बंटे होने का फायदा उन ताकतों को मिल रहा है, जो पंजाब और पंथ के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए सभी पंजाब समर्थक ताकतों को एकजुट होना चाहिए। उनका मानना है कि अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर बंटे रहने से पंजाब के अहम मुद्दों पर साझा आवाज कमजोर पड़ती है। ऐसे में अकाली दल के विभिन्न धड़ों और पंथक संगठनों को आपसी मतभेद दूर कर एक मंच पर आने की जरूरत है।
अकाली दल पुनर सुरजीत से अलग होने के कारणों पर चंदूमाजरा ने कहा कि उन्होंने पंथक एकता के लिए सभी धड़ों को एक मंच पर लाने की अपील की थी। इस अपील पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया से उन्हें यह स्पष्ट हो गया कि दोनों पक्षों की सोच, विचार और कार्यशैली में तालमेल नहीं है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए संगठन से अलग होने का फैसला लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन छोड़ने के बावजूद पंजाब, पंथ, पंजाबी भाषा और संस्कृति तथा प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम रहेगी। प्रो. चंदूमाजरा के जल्द परिवार सहित शिरोमणि अकाली दल (बादल) में शामिल होने की तैयारी को पंजाब की अकाली राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। उनके इस फैसले से अकाली दल के अलग-अलग धड़ों के बीच एकजुटता की चर्चा को भी नई दिशा मिल सकती है।
Click Here👉 पंजाब से जुड़ी खबरें पढें


