Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Pushkar Singh Dhami: देहरादून में IFS अधिकारियों से बोले CM धामी: इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन ही प्राथमिकता

AAmandeep Singh
Pushkar Singh Dhami: देहरादून में IFS अधिकारियों से बोले CM धामी: इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन ही प्राथमिकता

देहरादून में IFS अधिकारियों से बोले CM धामी: इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन ही प्राथमिकता

शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

Pushkar Singh Dhami: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में भारतीय वन सेवा (IFS) के युवा अधिकारियों के लिए संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वन सेवा केवल एक प्रशासनिक नौकरी नहीं है, बल्कि यह देश की प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता को सुरक्षित रखने की एक बड़ी जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में अधिकारियों की भूमिका और अधिक संवेदनशील हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों का आह्वान किया कि वे अपनी प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ वनों के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी ध्यान में रखें।

विज्ञापन

उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण जीवन को बताया प्रेरणास्रोत

कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति का देवभूमि में स्वागत करते हुए कहा कि जमीनी स्तर से उठकर देश के द्वितीय सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा देश के युवाओं के लिए एक मिसाल है।

इस दौरान अकादमी के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया और कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम समेत वन विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ का संतुलन ही उत्तराखंड की पहचान

उत्तराखंड के भू-भाग का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा वनों से आच्छादित है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर काम कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार के ‘मिशन LiFE’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियानों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।

राज्य सरकार द्वारा वन संरक्षण के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

अतिक्रमण पर बड़ा प्रहार: प्रदेश में चलाए गए अभियान के तहत लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है।

तकनीक का इस्तेमाल: उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां अवैध कटान और वनाग्नि पर नजर रखने के लिए समर्पित ‘फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स’ बनाई गई है।

ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर राजाजी नेशनल पार्क के पास बना 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर विकास और पर्यावरण संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है।

चारधाम पर डिजिटल पहल: कचरा प्रबंधन के लिए चारधाम मार्ग पर ‘डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम’ लागू किया गया है।

स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण और सुरक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज की आवाजाही को आसान बनाने के लिए नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। वहीं, मानव-वन्यजीव संघर्ष से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अनुग्रह राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।

इसके अलावा, वनाग्नि रोकने में जुटे ‘फायर वॉचर्स’ के लिए जीवन बीमा और पिरुल (चीड़ की पत्तियां) एकत्रीकरण के जरिए ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। संकट की स्थिति से निपटने के लिए बायोफेंसिंग, क्विक रिस्पांस टीम और 24 घंटे काम करने वाली वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 को और अधिक सक्रिय किया गया है। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी युवा अधिकारियों को निष्ठा और समर्पण के साथ राष्ट्रसेवा करने की शुभकामनाएं दीं।

यह भी पढ़ें– नूंह में ACB का बड़ा एक्शन, पोक्सो केस में अनुकूल रिपोर्ट देने के नाम पर 2.5 लाख रिश्वत लेते डॉक्टर गिरफ्तार

विज्ञापन

उत्तराखंड की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।