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Krishi Adan Anudan Yojana: सूखा और ओलावृष्टि से नुकसान पर राजस्थान सरकार देगी ₹22500 तक का मुआवजा

Krishi Adan Anudan Yojana: सूखा और ओलावृष्टि से नुकसान पर राजस्थान सरकार देगी ₹22500 तक का मुआवजा

राजस्थान के किसानों के लिए खुशखबरी

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AAmandeep Singh

Krishi Adan Anudan Yojana: रत की कृषि व्यवस्था में मौसम की अनिश्चितता हमेशा से सबसे बड़ा जोखिम रही है। महीनों की हाड़-तोड़ मेहनत से तैयार खड़ी फसल जब अचानक ओलावृष्टि, सूखे या बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ जाती है, तो किसान के सामने कर्ज और भुखमरी का संकट खड़ा हो जाता है।

राजस्थान जैसे राज्य में, जहां खेती का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह मानसूनी बारिश के भरोसे है, यह संकट कहीं ज्यादा गहरा है। इसी कड़वी हकीकत को देखते हुए राज्य सरकार ‘कृषि आदान अनुदान सहायता योजना’ के जरिए किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम कर रही है। सरकार का मकसद साफ है कि आपदा की स्थिति में किसान को तुरंत इतनी वित्तीय मदद मिल सके कि वह अगली फसल के लिए दोबारा खड़ा हो सके।

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आपदा के हर रूप पर मिलेगी राहत, ऐसे तय होता है नुकसान

इस योजना का सीधा फायदा उन काश्तकारों को मिल रहा है जिनकी फसलें प्रकृति के बदले मिजाज के कारण तबाह हो जाती हैं। सरकार ने इसके दायरे को काफी व्यापक रखा है, जिसमें सूखा, बाढ़, अत्यधिक भारी बारिश, ओलावृष्टि और पाला जैसी तमाम आपदाओं को शामिल किया गया है।

नुकसान होने के बाद अमूमन किसानों को दफ्तरों की खाक छाननी पड़ती थी, लेकिन अब व्यवस्था बदली है। आपदा आते ही जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें धरातल पर उतरकर नुकसान का सर्वे और सटीक मूल्यांकन करती हैं। इसी जमीनी रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों की पात्रता तय की जाती है और बिना किसी बिचौलिए के सहायता राशि सीधे उनके खातों में पहुंचती है।

सिंचित और बारानी जमीन के हिसाब से तय हैं मुआवजे के आंकड़े

राज्य सरकार ने इस आर्थिक मदद का खाका स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) के कड़े मानकों के अनुरूप तैयार किया है। मुआवजे की रकम इस बात पर निर्भर करती है कि खेत किस प्रकार का है और वहां सिंचाई की व्यवस्था क्या है।

ध्यान दें: सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस विशेष राहत योजना के तहत मिलने वाला लाभ एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की कृषि भूमि के नुकसान पर ही दिया जाएगा।

न फॉर्म भरने का झंझट, न दफ्तरों के चक्कर; पटवारी खुद दर्ज करेंगे ब्योरा

इस पूरी योजना की जो बात इसे बाकी सरकारी स्कीमों से अलग और बेहद प्रभावी बनाती है, वह है इसकी बेहद सरल प्रक्रिया। पीड़ित किसान को मदद पाने के लिए किसी ई-मित्र या सरकारी दफ्तर के चक्कर काटकर आवेदन फॉर्म नहीं भरना है। नुकसान की पूरी जानकारी संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा सीधे डीएमआईए (DMIA) पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाती है।

व्यवस्था को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सरकार ने इसकी समयसीमा भी तय कर दी है। इसके तहत खरीफ की फसलों के नुकसान का पूरा ब्योरा हर साल 31 मार्च तक और रबी फसलों से जुड़ा डेटा 30 सितंबर तक पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड कर दिया जाता है, ताकि समय रहते मदद खातों में भेजी जा सके।

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