Rajasthan Complaint Helpline: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन-181 के कॉल सेंटर का निरीक्षण किया और शिकायतों के निस्तारण की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, शिकायतकर्ताओं के संतुष्टि स्तर में एक साल के भीतर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर 2025 में परिवाद निस्तारण से संतुष्ट लोगों का स्तर 58 प्रतिशत था, जो सितंबर 2026 में बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत पहुंच गया।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने परिवाद निस्तारण में हुई प्रगति और शिकायतकर्ताओं के संतुष्टि स्तर में आई बढ़ोतरी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार के लगातार प्रयासों का असर अब शिकायत निस्तारण की गुणवत्ता और लोगों की संतुष्टि में दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 में राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण को लेकर परिवादियों का संतुष्टि स्तर 58 प्रतिशत था। सितंबर 2026 तक यह बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया। इस तरह एक वर्ष में संतुष्टि स्तर में 12 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है। आमजन के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि केवल शिकायत दर्ज करने तक प्रक्रिया सीमित न रहे, बल्कि उसके समाधान की गुणवत्ता पर भी अधिक ध्यान दिया जाए।
शिकायतों की संख्या 2.50 लाख से बढ़कर करीब 4 लाख हुई
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सितंबर 2025 में जहां करीब 2.50 लाख परिवाद प्राप्त हुए थे, वहीं सितंबर 2026 में यह संख्या बढ़कर लगभग 4 लाख हो गई। शिकायतों की बढ़ती संख्या के बावजूद निस्तारण की प्रक्रिया में भी तेजी दर्ज की गई है। अक्टूबर 2025 में लगभग 2.48 लाख परिवादों का निस्तारण किया गया था। सितंबर 2026 में निस्तारित परिवादों की संख्या बढ़कर लगभग 4.50 लाख पहुंच गई। इससे स्पष्ट है कि हेल्पलाइन पर बढ़ते कामकाज के साथ शिकायतों के समाधान की क्षमता में भी वृद्धि की गई है।
परिवादों के समाधान की गति में भी बदलाव दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष सितंबर में एक शिकायत के निस्तारण में औसतन 23 दिन का समय लगता था।अब औसत निस्तारण समय घटकर 13 दिन रह गया है। यानी शिकायतकर्ता को पहले की तुलना में औसतन करीब 10 दिन कम इंतजार करना पड़ रहा है। मुख्य सचिव के निरीक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि लंबित शिकायतों की संख्या में कमी आई है। शिकायतों की बढ़ती संख्या के बीच लंबित मामलों को कम करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहता है, ऐसे में निस्तारण की गति बढ़ने का सीधा असर आमजन को मिलने वाली राहत पर पड़ता है।
मुख्य सचिव ने वीडियो कॉल पर सुनीं लोगों की समस्याएं
निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने ई-जनसुनवाई के तहत विभिन्न विभागों से जुड़े शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, कृषि, विद्युत और सार्वजनिक निर्माण विभाग से संबंधित मामलों की स्थिति जानी। उन्होंने झुंझुनूं के संपत और नागौर के सोमाराम से पेयजल कनेक्शन और बोरवेल शुरू करवाने से संबंधित शिकायतों पर बात की। चूरू के ओमप्रकाश से फसल बीमा क्लेम के मामले में जानकारी ली गई। दौसा के कैलाश मीणा और मुकेश ने खाद-बीज की उपलब्धता और फार्म पॉन्ड की लंबित अनुदान राशि से जुड़ी समस्याएं रखीं। मुख्य सचिव ने इन मामलों में संबंधित विभागों से कार्रवाई की स्थिति पर जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने भीलवाड़ा के पप्पूलाल और चित्तौड़गढ़ के भैरूलाल से बिजली मीटर की मरम्मत से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की। इसके अलावा कोटपूतली-बहरोड़ के रोहतास और बारां के बबलेश से सड़क संबंधी शिकायतों की जानकारी ली। वीडियो कॉल के दौरान ही वी. श्रीनिवास ने संबंधित अधिकारियों को इन मामलों में त्वरित और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ताओं को जल्द राहत मिलनी चाहिए और विभागों को मामलों को प्राथमिकता के साथ देखना चाहिए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि परिवाद निस्तारण केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर नहीं रहना चाहिए। हर शिकायतकर्ता की समस्या का गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना जरूरी है। राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन-181 पर बढ़ती शिकायतों के साथ निस्तारण समय में कमी और संतुष्टि स्तर में बढ़ोतरी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अहम संकेत है। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़ती शिकायतों के दबाव के बीच हेल्पलाइन समाधान की गति और गुणवत्ता को किस तरह बनाए रखती है।
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