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Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर राखी में कितनी गांठ लगाना होता है शुभ? जानिए 3 गांठों के पीछे का धार्मिक रहस्य

Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर राखी में कितनी गांठ लगाना होता है शुभ? जानिए 3 गांठों के पीछे का धार्मिक रहस्य

रक्षाबंधन पर राखी में कितनी गांठ लगाना होता है शुभ? जानिए 3 गांठों के पीछे का धार्मिक रहस्य

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AAmandeep Singh

Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर राखी में कितनी गांठ लगाना होता है शुभ? जानिए 3 गांठों के पीछे का धार्मिक रहस्य
रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ एक रेशमी धागा कलाई पर सजाने भर का नाम नहीं है, बल्कि यह भाई और बहन के बीच के उस अनमोल रिश्ते को दोहराने का एक पावन जरिया है।

जब बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी कलाई पर राखी का धागा सजाती है, तो उस वक्त मन में दुआएं और आंखों में ढेर सारा स्नेह होता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि राखी बांधते समय उसमें कितनी गांठें लगाई जानी चाहिए? अक्सर रक्षाबंधन के दिन घरों में यह सवाल सुनने को मिल ही जाता है।

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वैसे तो अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अपनी-अपनी रीति-रिवाज होते हैं। कुछ लोग एक ही गांठ लगाकर राखी को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, तो कई घरों में बुजुर्ग तीन गांठें लगाने की हिदायत देते हैं। आइए जानते हैं कि राखी में तीन गांठें बांधने की परंपरा आखिर इतनी खास क्यों मानी जाती है और इसके पीछे क्या धार्मिक व भावनात्मक मायने छिपे हैं।

तीन गांठों का शुभ रहस्य: हर गांठ में छिपा है एक अनमोल संकल्प

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में ‘तीन’ के अंक को अक्सर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के त्रिदेवीय संतुलन या फिर तीन मुख्य मनोकामनाओं से जोड़कर देखा जाता है। जब कोई बहन भाई की कलाई पर तीन गांठें बांधती है, तो उसका एक खास मकसद होता है:

पहला बंधन — रिश्ते की अटूट मजबूती:

राखी की पहली गांठ भाई-बहन के उस रिश्ते के नाम होती है, जो बचपन की छोटी-मोटी लड़ाइयों, खट्टी-मीठी नोकझोंक और ढेर सारे दुलार से सींचा गया होता है। यह गांठ इस बात का प्रतीक है कि समय चाहे जैसा भी हो, दोनों का आपसी प्रेम हमेशा अटूट रहेगा।

दूसरा बंधन — सुख, समृद्धि और तरक्की:

दूसरी गांठ बांधते समय बहन ईश्वर से प्रार्थना करती है कि उसके भाई के जीवन में हमेशा सुख-समृद्धि, सफलता और मानसिक शांति बनी रहे। आधुनिक दौर में यह भावना दोनों तरफ से होती है—भाई भी अपनी बहन की खुशहाली और उसके सपनों की उड़ान के लिए यही कामना करता है।

तीसरा बंधन — दीर्घायु और सुरक्षा की सुरक्षा-कावच:

तीसरी और अंतिम गांठ को भाई की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और जीवन की हर विपत्ति से उसकी रक्षा की भावना से जोड़ा जाता है। यह गांठ विश्वास दिलाती है कि दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा ढाल बनकर खड़े रहेंगे।

क्या तीन गांठें लगाना ही अनिवार्य है?

अगर आपके मन में यह संशय है कि तीन से कम या ज्यादा गांठ लगाने से पर्व का फल कम हो जाएगा, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। शास्त्रों और लोक परंपराओं में यह स्पष्ट है कि राखी बांधने में मुख्य भूमिका ‘भाव’ की होती है, न कि गांठों की संख्या की।

यदि आपके परिवार में एक ही गांठ लगाने की पुरानी परंपरा रही है या फिर राखी का धागा ऐसा है कि उसमें ज्यादा गांठें नहीं लग सकतीं, तो अपनी सहूलियत और पारिवारिक रीति-रिवाजों का पालन करना ही सबसे बेहतर है। राखी में गांठें कितनी भी हों, सबसे ज्यादा मायने रखती है वह दुआ, जो बहन अपने भाई की कलाई पर धागा सजाते वक्त दिल से मांगती है।

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