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Rampal Hisar Court: 11 साल जेल काटने के बाद अब कोर्ट जाने में घबरा रहा रामपाल, सुरक्षा का दिया हवाला

AAmandeep Singh
11 साल जेल काटने के बाद अब कोर्ट जाने में घबरा रहा रामपाल, सुरक्षा का दिया हवाला
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हरियाणा। देशद्रोह जैसे संगीन आरोपों का सामना कर रहा सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल अब हिसार की अदालत की चौखट पर कदम रखने से कतरा रहा है। करीब 11 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने के बाद हाल ही में जमानत पर बाहर आए रामपाल ने 16 मई को होने वाली अपनी पेशी के लिए कोर्ट में एक खास अर्जी लगाई है। रामपाल की मांग है कि उसे व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए हाजिर होने की इजाजत दी जाए।

सोनीपत के आश्रम में ‘सम्मान’ और कोर्ट में ‘खौफ’

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फिलहाल रामपाल सोनीपत के धमाणा गांव स्थित अपने पैतृक आश्रम में समय बिता रहा है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ आश्रम के भीतर रामपाल खुद को ‘महान’ साबित करने की कवायद में जुटा है, जहां खाप प्रतिनिधि और राजनेता उसके चरणों में नतमस्तक हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानून का सामना करने के नाम पर उसके पसीने छूट रहे हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जैस्मीन शर्मा की अदालत ने रामपाल की इस अर्जी पर हरियाणा पुलिस से 16 मई तक जवाब तलब किया है।

वकील का तर्क: सुरक्षा है सबसे बड़ी चिंता

रामपाल के अधिवक्ता महेंद्र सिंह नैन का कहना है कि अर्जी में सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है। रामपाल के समर्थकों और अतीत की हिंसक घटनाओं को देखते हुए वकील ने तर्क दिया है कि कोर्ट परिसर में व्यक्तिगत पेशी से सुरक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है। अब गेंद पुलिस के पाले में है; उसे यह बताना होगा कि क्या वह रामपाल को सुरक्षित कोर्ट तक लाने में सक्षम है या फिर वीसी के जरिए पेशी का विकल्प ही बेहतर है।

2014 का वो ‘खूनी’ बरवाला कांड

इस पूरे मामले की जड़ें साल 2014 के उस बहुचर्चित बरवाला कांड से जुड़ी हैं, जिसने पूरे देश को हिला दिया था। सतलोक आश्रम में पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच हुए भीषण टकराव में कई लोगों की जान गई थी। इसके बाद रामपाल पर देशद्रोह सहित हत्या जैसे कई गंभीर मुकदमे दर्ज हुए थे। लंबे समय तक हिसार की जेल में बंद रहने के बाद इसी साल 8 अप्रैल को हाईकोर्ट ने उसे नियमित जमानत दी थी।

हत्या के मामलों में उम्रकैद, पर सजा निलंबित

रामपाल का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है। वह जिला अदालत से चार मामलों में बरी जरूर हो चुका है, लेकिन हत्या के दो अलग-अलग मामलों में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। फिलहाल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी इन सजाओं को निलंबित कर रखा है। 16 मई की सुनवाई न केवल रामपाल के भविष्य के लिए, बल्कि पुलिस के जवाब पर भी टिकी है कि वह इस ‘हाई-प्रोफाइल’ आरोपी को कोर्ट लाने के लिए कितनी तैयार है।

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