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Sonam Wangchuk Ends Fast: मेदांता में 27वें दिन टूटा सोनम वांगचुक का अनशन, जेपी नड्डा ने पिलाया जूस

Sonam Wangchuk Ends Fast: मेदांता में 27वें दिन टूटा सोनम वांगचुक का अनशन, जेपी नड्डा ने पिलाया जूस

सोनम वांगचुक का अनशन खत्म: जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों पर नहीं होंगे केस, संसद में होगी पेपर लीक पर चर्चा

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AAmandeep Singh

Sonam Wangchuk Ends Fast: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और NEET पेपर लीक के विरोध में पिछले 27 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती वांगचुक को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। इस दौरान लद्दाख एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के शीर्ष प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

अनशन समाप्त करने से ठीक पहले सरकार और वांगचुक के बीच लगभग दो दिनों तक बेहद सख्त बातचीत का दौर चला। वांगचुक इस बात पर अड़े थे कि जब तक सरकार की ओर से मौखिक की बजाय लिखित में ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे अनशन खत्म नहीं करेंगे। आखिरकार, केंद्रीय मंत्रियों द्वारा सरकार का आधिकारिक पत्र पढ़कर सुनाए जाने और सौंपे जाने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदला।

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65 सांसदों का समर्थन और सरकार से 3 प्रमुख बिंदुओं पर बनी सहमति

अनशन तोड़ने के बाद जारी लगभग 3 मिनट के वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें हस्ताक्षर युक्त पत्र सौंपा है। इन सांसदों ने संसद के पटल पर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और NEET पेपर लीक मामले पर व्यापक चर्चा कराने का वचन दिया है।

इसके साथ ही, सरकार द्वारा सौंपे गए लिखित दस्तावेज में तीन प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया गया है:

मुकदमों से राहत: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई पुलिस कार्रवाई या FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

संसद में गहन चर्चा: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर संसद के आगामी सत्र में विस्तार से बहस कराई जाएगी।

पीड़ितों के लिए मुआवजा: NEET पेपर लीक की घटनाओं से आहत होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को उपयुक्त वित्तीय मुआवजा देने पर सरकार सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।

जूस पीने के दौरान वांगचुक ने मुस्कुराते हुए कहा, “26-27 दिनों के लंबे अंतराल के बाद इस जूस का स्वाद वाकई बहुत बेहतरीन लग रहा है, हालांकि मकसद के लिए भूखे रहने का स्वाद भी बुरा नहीं होता।”

इस्तीफे की राजनीति से अलग वांगचुक का ध्यान व्यवस्था सुधार पर

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे राजनीतिक घटकों और सोनम वांगचुक के रुख में साफ अंतर देखने को मिला है। जंतर-मंतर पर डटे संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेता जहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं वांगचुक ने अपने संदेश में इस्तीफे का कोई जिक्र नहीं किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वांगचुक का प्राथमिक उद्देश्य राजनीतिक इस्तीफे हासिल करने के बजाय व्यवस्थागत सुधार और आंदोलन में शामिल युवाओं के भविष्य की सुरक्षा करना था। सरकार द्वारा तीनों प्रमुख नीतिगत मांगें मान लिए जाने के बाद उन्होंने अनशन आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा।

मेदांता के डॉक्टरों की देखरेख में स्वास्थ्य पूरी तरह स्थिर

उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था। वहां डॉक्टरों की एक विशेष मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है।

अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी द्वारा जारी ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक की स्थिति पूरी तरह स्थिर (Stable) है और वे पूरी तरह होश में हैं। उनके सभी वाइटल पैरामीटर्स सामान्य सीमा के भीतर हैं और उन्हें दिया जा रहा चिकित्सकीय उपचार उनकी पूर्ण सहमति से ही आगे बढ़ाया जा रहा है।

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