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Thought of the day: बड़ा सोचना क्यों है जरूरी? इन बुनियादी सिद्धांतों से बदलें अपनी किस्मत

Thought of the day: बड़ा सोचना क्यों है जरूरी? इन बुनियादी सिद्धांतों से बदलें अपनी किस्मत

समय को क्यों माना गया है सबसे बड़ा शिक्षक

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GGaganpreet Kaur

Thought of the day: कहते हैं कि जीवन किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं है, जहां हर दिन एक नया पाठ पढ़ने को मिलता है। समाज और व्यक्ति के विकास को यदि करीब से देखें, तो साफ समझ आता है कि ‘समय सबसे बड़ा शिक्षक है’। इतिहास गवाह है कि समय की मार और उसकी सीख ने इंसान को सबसे ज्यादा बदला है। जीवन का हर एक छोटा-बड़ा अनुभव हमें कुछ न कुछ नया सिखा कर जाता है, बशर्ते हम एक सजग छात्र की तरह उसे सीखने के लिए तैयार रहें।

वैचारिक क्रांति से ही संभव है बड़ा बदलाव

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आज के इस दौर में जहां प्रतिस्पर्धा चरम पर है, वहां एक बात बिल्कुल स्पष्ट है—’बड़ा सोचो, बड़ा करो’। किसी भी महान आविष्कार, बड़े आंदोलन या सफल बिजनेस साम्राज्य की शुरुआत हमेशा एक छोटे से विचार से ही होती है। जब तक कोई व्यक्ति अपनी सोच के दायरे को सीमित रखेगा, तब तक वह असाधारण सफलता की उम्मीद नहीं कर सकता। सफलता की पहली सीढ़ी ही यही है कि आप लीक से हटकर कुछ बड़ा सोचने का साहस दिखाएं।

गलतियों से डरें नहीं, उन्हें मार्गदर्शक बनाएं

अक्सर लोग असफलता या आलोचना के डर से नए रास्तों पर चलने से कतराते हैं। लेकिन सच तो यह है कि ‘गलतियाँ वही करते हैं जो कुछ करने की कोशिश करते हैं’। जो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं, उनके हिस्से में न तो कोई गलती आती है और न ही कोई बड़ी उपलब्धि। पत्रकारिता के अपने लंबे सफर में मैंने कई ऐसी शख्सियतों को करीब से देखा है, जिन्होंने अपनी नाकामियों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। असफलता से मुंह मोड़ने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही असल बुद्धिमानी है।

“सफलता का कोई सीधा रास्ता नहीं होता, यह गलतियों और सुधारों के अंतहीन सिलसिले से होकर ही गुजरती है।”

मानवता की कसौटी: संवेदनशीलता और व्यवहार

इन सब के बीच, एक इंसान के तौर पर हमारा समाज के प्रति क्या दायित्व है? इसका सबसे सरल और सटीक जवाब यही है—’दूसरों के लिए वही करो जो तुम चाहते हो’। यदि हम समाज में सम्मान, प्रेम और संवेदनशीलता की उम्मीद करते हैं, तो पहले हमें दूसरों को भी वही देना होगा। आज के दौर में जहां दूरियां बढ़ रही हैं, वहां यही विचार सच्चे मानवतावादी दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। दूसरों के प्रति हमारा व्यवहार ही अंततः यह तय करता है कि हमने एक मनुष्य के रूप में कितनी प्रगति की है।

यह भी पढ़ें–मुश्किलों को मात देकर लक्ष्य पर कैसे डटे रहें?

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