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Tohana Protest: टोहाना में संयुक्त किसान मोर्चा का फूटा गुस्सा, महंगाई की प्रतियां फूंक तेल-गैस के दामों पर घेरा

AAmandeep Singh
Tohana Protest: टोहाना में संयुक्त किसान मोर्चा का फूटा गुस्सा, महंगाई की प्रतियां फूंक तेल-गैस के दामों पर घेरा
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फतेहाबाद। देश में आम आदमी की कमर तोड़ रही महंगाई और रोज-रोज बढ़ते ईंधन के दामों को लेकर शनिवार को टोहाना की सियासत गरमा गई। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों किसान और कार्यकर्ता टोहाना पक्का मोर्चा पर इकट्ठा हुए। जिलाध्यक्ष लाभ सिंह की अगुवाई में हुए इस विरोध प्रदर्शन में किसानों के चेहरे पर सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर साफ गुस्सा देखा जा सकता था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सांकेतिक रूप से महंगाई के विरोध में प्रतियों का दहन किया।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए किसान नेता लाभ सिंह ने सीधा हमला कॉरपोरेट जगत और सरकार के गठजोड़ पर बोला। उन्होंने कहा कि आज देश की आम जनता और किसान महंगाई की चक्की में पीसने को मजबूर हैं, जबकि सरकार का पूरा ध्यान महज कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों की तिजोरियां भरने पर है। लाभ सिंह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार कम हो रही हैं, लेकिन इसका फायदा देश के उपभोक्ताओं को देने के बजाय सरकार टैक्स बढ़ाकर अपनी जेबें गर्म कर रही है। किसानों ने दोटूक चेतावनी दी कि जब तक पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम कम नहीं होते, उनका यह लोकतांत्रिक मोर्चा पीछे नहीं हटेगा।

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टोहाना वन विभाग का ‘पेड़ घोटाला’ भी गरमाया, दरोगा के ऑडियो ने मचाया हड़कंप

महंगाई के इस मंच से किसानों ने स्थानीय स्तर पर चल रहे एक और बड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पिछले दो-तीन दिनों से टोहाना में चर्चा का विषय बने अवैध पेड़ कटाई मामले को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि वन विभाग की जमीन से दिन-दिहाड़े 18 हरे-भरे पेड़ काट दिए गए, जो बिना प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों की शह के मुमकिन नहीं है।

दरअसल, इस मामले में नया मोड़ तब आया जब विभाग द्वारा केस दर्ज कराए जाने के बाद मुख्य आरोपी और आरा मशीन संचालक प्रिंस चावला ने वन विभाग के ही दरोगा सुरेंद्र की एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग सार्वजनिक कर दी। प्रिंस का दावा है कि वन विभाग के अधिकारी खुद लाखों रुपये के पेड़ अवैध रूप से कटवाते हैं और अब इस पूरे रैकेट का ठीकरा गरीब दिहाड़ीदार मजदूरों पर फोड़ा जा रहा है।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

किसान नेताओं ने इस पूरे प्रकरण को एक सुव्यवस्थित घोटाला करार दिया है। मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि टोहाना वन विभाग में तैनात तमाम संदिग्ध अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर यहां से ट्रांसफर किया जाए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की वकालत की गई है। किसानों ने प्रशासन को चेताया कि यदि केवल मोहरों (गरीब मजदूरों) को फंसाकर असली गुनहगारों को बचाने की कोशिश की गई, तो संयुक्त किसान मोर्चा आने वाले दिनों में टोहाना की सड़कों पर एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा।

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