VB G RAM G Scheme में काम करने वाले मजदूरों को 3 महीने से नहीं मिला वेतन
VB G RAM G Scheme में काम करने वाले मजदूरों को 3 महीने से नहीं मिला वेतन
VB G RAM G Scheme : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘विकसित भारत ग्राम रोजगार आजीविका मिशन’ (वीबीजी रामजी) के तहत फरीदकोट जिले में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के सामने आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो गया है। बीते तीन महीनों से हाड़-तोड़ मेहनत करने के बावजूद मजदूरों के खातों में फूटी कौड़ी नहीं पहुंची है। बकाया मजदूरी न मिलने से क्षुब्ध मजदूरों ने अब सरकार के खिलाफ सीधे संघर्ष का ऐलान कर दिया है।
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लागू किए गए नए कानून ‘विकसित भारत ग्राम रोजगार आजीविका मिशन’ (वीबीजी रामजी) की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। फरीदकोट जिले के गांव पिपली में जुटे ग्रामीण मजदूरों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला।
‘नरेगा रोजगार परते मजदूर यूनियन’ के जिला सचिव कॉमरेड गोरा सिंह पिपली ने मजदूरों की एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकार नए कानून का जमकर ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर पसीना बहाने वाले मजदूरों को तीन महीने से मजदूरी तक नहीं मिली है। काम करने के बावजूद पारिश्रमिक न मिलने से मजदूर परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
बड़े प्रोजेक्ट बंद होने से 125 दिनों के रोजगार पर मंडराया संकट
मजदूर नेता ने नीतिगत कमियों को उजागर करते हुए बताया कि सरकार ने 1 जुलाई से इस नए कानून को लागू किया था। मजदूर लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है।
यूनियन का आरोप है कि सरकार ने सुनियोजित तरीके से उन बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को बंद कर दिया है, जिनमें सैकड़ों मजदूरों को एक साथ महीनों तक काम मिलता था। अब उनकी जगह छोटे-छोटे काम दिए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों के लिए साल में तय 125 दिन का रोजगार लक्ष्य पूरा कर पाना नामुमकिन साबित हो रहा है।
सोशल मीडिया के दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कॉमरेड गोरा पिपली ने कहा कि मंत्री महोदय सोशल मीडिया पर रील पोस्ट करके सात दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान करने और देरी होने पर मुआवजा देने के बड़े-बड़े दावे करते हैं।
हकीकत यह है कि मुआवजा तो दूर, मजदूरों को उनकी मेहनत की मूल दिहाड़ी के लिए भी तरसाया जा रहा है। प्रचार और वास्तविकता के बीच इस बड़े अंतर से ग्रामीण मजदूरों में गहरा असंतोष फैल रहा है।
बकाया मजदूरी जारी करने और बड़े काम शुरू करने की मांग
सभा के दौरान उपस्थित मजदूरों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन ने प्रशासन और सरकार के समक्ष दो मुख्य मांगें रखी हैं:
पहला, पिछले तीन महीनों से रोकी गई पूरी मजदूरी तुरंत मजदूरों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाए। दूसरा, बड़ी नहरों, सिंचाई नालों, रेलवे लाइनों और कच्ची सड़कों के रखरखाव से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू किया जाए, ताकि मजदूरों का 125 दिन का रोजगार पक्का हो सके।
मजदूर नेताओं ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही बकाया राशि का भुगतान नहीं किया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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