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Yamunanagar News: 4 सितंबर को मनेगी जन्माष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा से बन रहा द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग

Yamunanagar News: 4 सितंबर को मनेगी जन्माष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा से बन रहा द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग

4 सितंबर को मनेगी जन्माष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा से बन रहा द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग

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GGaganpreet Kaurस्रोत: संजीव चौहान (यमुनानगर)

Yamunanagar News: संजीव चौहान (यमुनानगर) भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को देश-विदेश में हर्षोल्लास और अपार भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। मथुरा की पावन जन्मभूमि से लेकर हरियाणा के यमुनानगर और देश के कोने-कोने में स्थित कृष्ण मंदिरों में इस अवसर पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। बाजारों में कान्हा के लिए रंग-बिरंगी मनमोहक पोशाकें, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, नक्काशीदार झूले और पूजा सामग्री की मांग बढ़ने से जबरदस्त चहल-पहल देखने को मिल रही है।

यमुनानगर स्थित आमादलपुर के प्राचीन सूर्यकुंड मंदिर के प्रसिद्ध आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि इस बार की जन्माष्टमी धार्मिक और ज्योतिषीय गणनाओं के लिहाज से अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के साथ-साथ रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा का वृषभ राशि में प्रवेश का ऐसा अनूठा तालमेल बैठ रहा है, जो ठीक वैसा ही है जैसा द्वापर युग में कान्हा के जन्म के समय बना था। इस दुर्लभ संयोग के चलते इस बार का व्रत और पूजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यकारी रहेगा।

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मध्यरात्रि में शंखनाद के साथ होगा कान्हा का जन्म, पंचामृत से होगा बाल गोपाल का महाअभिषेक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, असुर कंस के अत्याचारों का अंत करने और पृथ्वी पर धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में अवतार लिया था। जन्माष्टमी के दिन भक्त सुबह स्नान ध्यान कर पूरे दिन व्रत का संकल्प लेते हैं और मंदिरों व घरों में भजन-कीर्तन, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ तथा बाल लीलाओं का स्मरण करते हैं। घरों में लड्डू गोपाल को पीले वेश में सजाकर सुंदर झूलों में विराजमान कराया जाता है।

पर्व की सबसे मुख्य पूजा मध्यरात्रि 12 बजे होती है, जब कान्हा के जन्म लेते ही मंदिरों और पूजा घरों में शंख, घंटे और घड़ियालों की गूंज के साथ ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज उठते हैं। इसके बाद बाल गोपाल का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल यानी पंचामृत से भव्य अभिषेक किया जाता है। फिर प्रभु को नए वस्त्र पहनाकर माखन-मिश्री, फल, पंजीरी और तरह-तरह के मिष्ठानों का भोग लगाकर महाआरती की जाती है।

सूर्यकुंड मंदिर में सजेंगी भव्य झांकियां, आचार्य त्रिलोक महाराज ने दिया निष्काम कर्म का संदेश

यमुनानगर के ऐतिहासिक आमादलपुर स्थित प्राचीन सूर्यकुंड मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर परिसर में कान्हा की बाल लीलाओं पर आधारित मनमोहक झांकियां तैयार की जा रही हैं और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। जन्माष्टमी की रात ठीक 12 बजे मंदिर में मुख्य पूजन व महाअभिषेक संपन्न कराया जाएगा।

आचार्य त्रिलोक महाराज ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि जन्माष्टमी केवल कर्मकांड या उत्सव तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमें भगवान के उपदेशों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। गीता में भगवान ने अर्जुन को जो कर्म और धर्म का पाठ पढ़ाया था, उसकी प्रासंगिकता आज के तनावपूर्ण दौर में और बढ़ गई है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि इस पर्व पर गरीब व जरूरतमंदों की सेवा करने, बुजुर्गों का सम्मान करने और समाज में सद्भाव बढ़ाने का संकल्प लें।

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