Narnaul Special Lok Adalat: नारनौल में 3 अक्टूबर को लगेगी विशेष लोक अदालत: चेक बाउंस और वित्तीय मामलों के निपटारे के लिए सीजेएम ने ली बैठक
नारनौल में 3 अक्टूबर को लगेगी विशेष लोक अदालत: चेक बाउंस और वित्तीय मामलों के निपटारे के लिए सीजेएम ने ली बैठक
Narnaul Special Lok Adalat: अदालतों में लंबित चेक बाउंस और वित्तीय लेन-देन के मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की चेयरपर्सन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. रितु वाई.के. बहल के मार्गदर्शन में नारनौल में आगामी 3 अक्टूबर को एक विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस अहम आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए डीएलएसए सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीलम कुमारी ने लघु सचिवालय में विभिन्न बैंकों, वित्तीय संस्थानों के प्रबंधकों और पैनल अधिवक्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई।
प्री-काउंसलिंग और आपसी समझौते पर जोर
बैठक के दौरान सीजेएम नीलम कुमारी ने सभी वित्तीय संस्थाओं के प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे 3 अक्टूबर को लगने वाली इस विशेष लोक अदालत से पहले ज्यादा से ज्यादा मामलों में प्री-काउंसलिंग का दौर शुरू करें।
उनका उद्देश्य यही है कि अदालत की चौखट तक पहुंचने से पहले ही दोनों पक्ष आपसी समझौते के जरिए अपने रास्ते अलग कर लें। विशेष तौर पर धारा 138 यानी चेक बाउंस और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबित मामलों में पक्षकारों को समय रहते नोटिस तामील कराने के सख्त आदेश दिए गए हैं, ताकि तय तारीख पर अधिक से अधिक मामलों का निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
समय और धन की बचत का बेहतरीन जरिया
वित्तीय पैनल अधिवक्ताओं को भी यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने मुवक्किलों और बैंक अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर समझौता योग्य मुकदमों की सूची तैयार करें। सीजेएम ने लोक अदालत के फायदों पर रोशनी डालते हुए कहा कि इस माध्यम से मामलों के निबटारे से न केवल अदालतों का बेशकीमती वक्त बचता है, बल्कि पक्षकारों का आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव भी कम होता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि लोक अदालत में सुनाया गया फैसला अंतिम होता है और इसके खिलाफ आगे अपील करने की जरूरत नहीं पड़ती। डीएलएसए सचिव ने अंत में आम जनता और बैंक ग्राहकों से पुरजोर अपील की है कि वे इस मौके का पूरा फायदा उठाएं और अपने पुराने वित्तीय विवादों को हमेशा के लिए खत्म करें।
