Punjab Vidhan Sabha: पंजाब विधानसभा में माइनिंग पर तीखी बहस, अश्वनी शर्मा के बयान पर AAP ने जताई आपत्ति
पंजाब विधानसभा में माइनिंग पर तीखी बहस
Punjab Vidhan Sabha: चंडीगढ़ स्थित पंजाब विधानसभा में मानसून सत्र के चौथे दिन अवैध माइनिंग का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। इसी दौरान केंद्र-राज्य संबंध, शिक्षा व्यवस्था, छात्रसंघ चुनाव और राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे विषयों पर भी लंबी चर्चा हुई। सदन में विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा, जबकि सरकार ने केंद्र पर पंजाब के अधिकारों और वित्तीय हिस्सेदारी को प्रभावित करने का आरोप लगाया। माइनिंग को लेकर शुरू हुई चर्चा जल्द ही राजनीतिक बयानबाजी में बदल गई। भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा के एक बयान पर आम आदमी पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जबकि कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
माइनिंग पर सरकार को घेरा, अश्वनी शर्मा का तंज
भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने आरोप लगाया कि पंजाब में अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को आम आदमी पार्टी के नेता धमकाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल दावों तक सीमित रहने के बजाय मौके पर जाकर यह देखना चाहिए कि ‘जिसकी खेत, उसकी रेत’ योजना की वास्तविक स्थिति क्या है।
बहस के दौरान अश्वनी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की स्थिति ऐसी हो गई है कि घर में लड़की पैदा हो तो जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल दी जाती है और लड़का पैदा हो तो उसका श्रेय खुद ले लिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने माइनिंग से 20 हजार करोड़ रुपये की आय का वादा किया था, लेकिन अब हर मुद्दे के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
AAP का पलटवार, मंत्री बोले- बयान सोच को दर्शाता है
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जवाब देते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोपों का विषय नहीं बल्कि केंद्र और राज्यों के अधिकारों का मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब का वैधानिक फंड रोक रही है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है।
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने अश्वनी शर्मा के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी उनकी सोच को दर्शाती है और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। हालांकि अश्वनी शर्मा ने अपने बयान को सही बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक मुहावरे का इस्तेमाल किया है और इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।
बाजवा ने जांच समिति बनाने की मांग उठाई
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि माइनिंग को लेकर लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में विधानसभा की एक समिति गठित कर वास्तविक स्थिति की जांच कराई जानी चाहिए।
इस पर मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि यदि समिति बनेगी तो उसके साथ पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की उस रिपोर्ट को भी रखा जाएगा, जिसमें 21 विधायकों के अवैध माइनिंग से जुड़े होने का उल्लेख किया गया था।
40 साल से छात्रसंघ चुनाव नहीं, निर्दलीय विधायक ने उठाया मुद्दा
निर्दलीय विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह ने युवाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में लगभग 30 लाख ग्रेजुएट हैं और करीब 20 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। उनके अनुसार, हाल के छात्र आंदोलनों ने यह साबित किया है कि जब युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते हैं तो सरकारें भी निर्णय बदलने पर मजबूर होती हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब की यूनिवर्सिटीज में लगभग 40 वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। लोकतांत्रिक नेतृत्व विकसित करने के लिए इन्हें दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकारी डिग्री कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी पर निर्भरता कम कर स्थायी शिक्षकों की भर्ती करने की मांग भी रखी।
खैहरा ने ‘वन नेशन’ नीतियों पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय के साथ राज्यों के अधिकारों का लगातार केंद्रीकरण हुआ है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के समय भी इसका विरोध हुआ था और आज राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता प्रभावित हुई है।
खैहरा ने कहा कि ‘वन नेशन-वन टैक्स’ के बाद अब ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ और ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ जैसी नीतियां भी राज्यों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने मांग की कि पंजाब विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर शिक्षा को दोबारा स्टेट लिस्ट में शामिल करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी जाए।
