Karnal News: करनाल में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से टकराया श्रद्धालुओं का कैंटर, दो दर्जन झुलसे

करनाल में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से टकराया श्रद्धालुओं का कैंटर, दो दर्जन झुलसे
Karnal News: करनाल जिले के घरौंडा कस्बे से देर रात एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। तेलु सिंह कॉलोनी में राजस्थान के बागड़ धाम के लिए रवाना हो रहे श्रद्धालुओं से भरा एक कैंटर ऊपर से गुजर रही 11000 वोल्ट की हाईटेंशन बिजली की तारों से टकरा गया। तारों के संपर्क में आते ही पूरे कैंटर में पलक झपकते ही भीषण करंट दौड़ गया। इस खौफनाक हादसे में करीब दो दर्जन महिला और पुरुष श्रद्धालु गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।
क्षमता से ज्यादा सवारियां और लोहे के पाइपों का खतरनाक जुगाड़
हादसे में घायल हुए प्रत्यक्षदर्शी संजय ने बताया कि कैंटर में क्षमता से ज्यादा करीब 50 से 60 श्रद्धालु सवार थे। श्रद्धालुओं की ज्यादा संख्या को देखते हुए कैंटर चालक ने वाहन के ऊपर लोहे के पाइप और रैकों का ढांचा खड़ा कर उसे दो मंजिला बना दिया था। इस खतरनाक जुगाड़ की वजह से गाड़ी की कुल ऊंचाई करीब 3 फीट बढ़ गई थी। देर रात जैसे ही चालक ने कैंटर को गली से आगे बढ़ाया, महज कुछ ही दूरी पर ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन से लोहे का ऊपरी ढांचा छू गया।
चीख-पुकार सुन मदद को दौड़े मोहल्लेवासी, खिड़कियों से फेंके गए बच्चे
करंट लगते ही कैंटर से आग की लपटें उठने लगीं और पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। धमाके और चीखों की आवाज सुनकर तेलु सिंह कॉलोनी के लोग तुरंत बिना अपनी जान की परवाह किए मौके की ओर दौड़े। जान बचाने की अफरा-तफरी के बीच श्रद्धालुओं ने कैंटर से सीधे नीचे छलांग लगानी शुरू कर दी, वहीं बदहवास माता-पिता अपने छोटे मासूम बच्चों को खिड़कियों से बाहर फेंकते नजर आए। स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए कैंटर में फंसे तमाम लोगों को बाहर निकाला।
अस्पताल में मची अफरा-तफरी, 7 गंभीर मरीज करनाल रेफर
हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सभी घायलों को घरौंडा के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सरकारी अस्पताल) पहुंचाया गया। अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर रोहित ने बताया कि देर रात अचानक बड़ी संख्या में झुलसे और चोटिल मरीज पहुंचे, जिससे एकबारगी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया। 7 मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए करनाल के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया है, जबकि कई मरीज अपनी मर्जी से परिजनों के साथ निजी अस्पतालों में चले गए।
