Success Story: 250 रुपये रोज से 90 हजार महीना, दिल्ली के इस लस्सी वाले की संघर्ष गाथा ने जीता लोगों का दिल

250 रुपये रोज से 90 हजार महीना, दिल्ली के इस लस्सी वाले की संघर्ष गाथा ने जीता लोगों का दिल
Success Story: अगर इंसान के भीतर परिस्थितियों से लड़ने का हुनर और मेहनत करने का जज्बा हो, तो तंगहाली भी घुटने टेकने पर मजबूर हो जाती है। सोशल मीडिया के इस दौर में आए दिन कई कहानियां सामने आती हैं, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर लस्सी बेचने वाले एक साधारण से इंसान की कहानी इन दिनों लाखों लोगों के दिलों को छू रही है।
महज 11 साल की नन्हीं उम्र में, जब बच्चे हाथों में किताबें थामते हैं, तब इस शख्स ने परिवार का पेट पालने के लिए हाथों में काम थाम लिया था। आज उनकी मेहनत का नतीजा यह है कि वे न केवल एक सफल मुकाम पर हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
बचपन में उठा पिता का साया, 250 रुपये से शुरू हुआ सफर
इनकी जीवन यात्रा की शुरुआत किसी त्रासदी से कम नहीं थी। बहुत छोटी उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ गया, जिससे परिवार पर अचानक आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। घर में कोई दूसरा कमाने वाला नहीं था, लिहाजा मजबूरी में आकर 11 साल की उम्र से ही काम ढूंढना पड़ा। शुरुआती दिनों में हाड़-तोड़ मेहनत के बाद बमुश्किल 250 रुपये रोजाना की दिहाड़ी मिल पाती थी। इतनी मामूली रकम से परिवार का गुजारा चलाना लोहे के चने चबाने जैसा था, लेकिन उन्होंने कभी काम को छोटा नहीं समझा और न ही हालातों से हार मानी।
लस्सी के स्वाद से बदली तकदीर, अब महीने की कमाई 90 हजार
सालों की ईमानदारी और निरंतर प्रयास के बाद समय ने करवट ली। उन्होंने दिल्ली में अपनी लस्सी की दुकान शुरू की, जिसके स्वाद के लोग कायल होते चले गए। हाल ही में वायरल हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया कि आज वे लस्सी बेचकर हर महीने लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। हालांकि, व्यापार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन आज वे जिस मुकाम पर हैं, वह उनके संघर्षपूर्ण अतीत के मुकाबले किसी सपने से कम नहीं है।
भाई-बहनों की शादी से लेकर बनाया दो मंजिला मकान
कमाई का जरिया बनने के बाद भी उनके पांव जमीन पर ही रहे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी; भाई-बहनों के हाथ पीले करवाए, अपनी शादी की और परिवार को हर वो सहूलियत दी जो कभी उनके पास नहीं थी। कभी अपनी एक छत को तरसने वाले इस शख्स ने उत्तर प्रदेश में अपना दो मंजिला पक्का मकान खड़ा किया है। यह मकान उनके लिए महज ईंट-गारे की इमारत नहीं, बल्कि सालों के पसीने और धैर्य की अनमोल निशानी है।
पिता की याद में छलक उठे आंसू
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इंटरव्यू के अंत में जब उनसे पूछा गया कि यदि ईश्वर उनसे कहें कि कोई एक मुराद मांग लो, तो वे क्या मांगेंगे? इस सवाल पर उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि वे आज भी सिर्फ अपने पिता को वापस मांगना चाहेंगे। वे कहते हैं कि आज उनके पास पैसा, घर और गाड़ियां सब हैं, लेकिन पिता की कमी कोई दौलत पूरी नहीं कर सकती। उनका यह संदेश हर उस व्यक्ति के लिए एक सीख है जो हालातों से घबराकर हिम्मत हार बैठता है।
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