September 4, 2026

राजस्थान निकाय चुनाव में अब 38,891 प्रत्याशी: 17,137 नामांकन खारिज, 10,112 ने नाम वापस लिए

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राजस्थान निकाय चुनाव में अब 38,891 प्रत्याशी: 17,137 नामांकन खारिज, 10,112 ने नाम वापस लिए

राजस्थान निकाय चुनाव

Rajasthan Local Body Election: राजस्थान के निकाय चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। प्रदेश के 10,245 वार्डों में अब 38,891 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार निकाय चुनाव के लिए कुल 69,811 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे, जिनमें से जांच के दौरान 17,137 खारिज हुए और 10,112 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही बीजेपी और कांग्रेस के सामने अब चुनावी समीकरण साधने की चुनौती है। दोनों दलों में टिकट वितरण के बाद कई स्थानों पर बगावत सामने आई है और पार्टी से टिकट नहीं मिलने वाले नेता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर गए हैं।

 

17,137 नामांकन खारिज, दोनों दलों को झटका

करीब 20 जिलों से मिले आंकड़ों के अनुसार बीजेपी और कांग्रेस के कम से कम 99 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हुए हैं। इनमें कांग्रेस के 57 और बीजेपी के 42 प्रत्याशी शामिल हैं। पूरे चुनाव में खारिज नामांकन की संख्या करीब 200 तक बताई गई है।

कांग्रेस को अजमेर और पाली में नामांकन खारिज होने से झटका लगा है। बीजेपी को भी दौसा और करौली समेत कई जिलों में नुकसान हुआ है। कई मामलों में नामांकन पत्र तकनीकी खामियों और पात्रता से जुड़ी वजहों के कारण खारिज हुए।

नामांकन खारिज होने के बाद दोनों दलों में प्रत्याशियों के चयन और नामांकन पत्रों की पहले से जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसका असर उन वार्डों के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है, जहां पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के सामने पहले से ही मजबूत दावेदार मौजूद थे।

 

टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय मैदान में उतरे बागी

बीजेपी और कांग्रेस की परेशानी सिर्फ नामांकन खारिज होने तक सीमित नहीं है। टिकट वितरण के बाद दोनों दलों के कई नेता और कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर गए हैं।

कांग्रेस ने बागियों को मनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिलों में सक्रिय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और वरिष्ठ नेता टीकाराम जूली समेत कई नेता असंतुष्ट दावेदारों से बातचीत कर रहे हैं।

जिला और विधानसभा स्तर के प्रभारियों को भी अधिकृत प्रत्याशियों के साथ समन्वय करने और बागियों को नाम वापस लेने के लिए मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस को आशंका है कि बागी प्रत्याशियों के मैदान में बने रहने से पार्टी का परंपरागत वोट बंट सकता है और इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।

 

BJP में भी टिकट बंटवारे पर नाराजगी

बीजेपी में भी टिकट वितरण को लेकर कई जगह नाराजगी सामने आई है। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी संगठन अब नाराज नेताओं को मनाने और अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल तैयार करने में जुटा है। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के राजस्थान दौरे की संभावना के बीच पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर चर्चा भी तेज है। वरिष्ठ नेता स्थानीय इकाइयों के साथ बातचीत कर रहे हैं, ताकि चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले असंतोष को कम किया जा सके।

 

77 प्रत्याशी निर्विरोध, इन वार्डों में मतदान नहीं होगा

राजस्थान निकाय चुनाव में 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इन वार्डों में अब मतदान नहीं होगा। पहले सामने आई जानकारी के अनुसार निर्विरोध निर्वाचित होने वाले प्रत्याशियों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवार शामिल हैं। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उन वार्डों की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है, जहां प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन के कारण मुकाबला मतदान से पहले ही खत्म हो गया।

 

38,891 प्रत्याशियों से कई वार्डों में मुकाबला बहुकोणीय

अब 38,891 प्रत्याशियों के मैदान में रहने से बड़ी संख्या में वार्डों में चुनावी मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच नहीं रहेगा। टिकट से वंचित दावेदारों के अलावा निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशी कई वार्डों में त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बना सकते हैं।

निकाय चुनाव में कई बार जीत का अंतर कम रहता है। ऐसे में बागी या निर्दलीय प्रत्याशी को मिलने वाले वोट बीजेपी या कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार के जीत-हार के समीकरण को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।

आम मतदाता के लिए इसका मतलब यह है कि स्थानीय निकाय चुनाव में इस बार उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने से कई वार्डों में मुकाबला ज्यादा बंटा हुआ नजर आएगा। पार्षद का चुनाव सीधे शहर और स्थानीय वार्ड की सड़क, सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ा होता है, इसलिए उम्मीदवारों के बीच वोटों का छोटा अंतर भी नतीजे पर असर डाल सकता है।

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