Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि) के मनोविज्ञान विभाग द्वारा ‘आत्महत्या रोकथाम दिवस-2026’ का आयोजन

कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सम्मानित करते विवि के अतिथिगण ।
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के मनोविज्ञान विभाग द्वारा गुरुवार को ‘आत्महत्या रोकथाम दिवस-2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘चेंजिंग द नरेटिव वद सुसाइड‘ रहा।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ आशा, संवेदनशीलता, संवाद और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 150 विद्यार्थियों ने सहभागिता की, जबकि 50 विद्यार्थियों ने विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर से सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित वरिष्ठ प्रोफेसर एन. एस. तुंग एवं प्रो. सुनिंद्र तुंग ने मुख्य संबोधन दिया। कार्यक्रम के संयोजक एवं मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. विश्वा चौधरी रहे, जबकि आयोजन का दायित्व विभाग की सहायक आचार्य डॉ. दीपिका लोहान ने निभाया।
कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आत्महत्या रोकथाम के लिए समाज में संवेदनशीलता, सहानुभूति और संवाद का वातावरण विकसित करना आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करने से व्यक्ति को अपनी भावनाएं साझा करने और समय पर सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा और शोध का केंद्र नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में एक-दूसरे के प्रति सहयोग, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
प्रो. एन. एस. तुंग ने कहा कि आत्महत्या रोकथाम की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हैकृव्यक्ति को सुना जाना और उसकी भावनाओं को समझा जाना। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे मानसिक तनाव या किसी भी कठिन परिस्थिति में स्वयं को अकेला न समझें तथा आवश्यकता पड़ने पर परिवार, मित्रों, शिक्षकों या विशेषज्ञों से सहायता लेने में संकोच न करें।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील संवाद और समय पर सहयोग किसी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। इसी क्रम में प्रो. सुनिंद्र तुंग ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नकारात्मक धारणाओं और संकोच को दूर करने की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां वे बिना किसी भय या संकोच के अपनी समस्याओं और भावनाओं को साझा कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और सहयोग की भावना रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने कविता, फोटोग्राफी, रंगोली, पोस्टर निर्माण, गायन तथा एकल एवं युगल प्रस्तुति जैसी विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से आशा, दृढ़ता, जुड़ाव तथा जीवन के महत्व से संबंधित प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में मनोविज्ञान विभाग के डॉ. रवि प्रताप पांडेय एवं डॉ. विष्णु नारायण कुचेरिया, पत्रकारिता विभाग के डॉ. नीरज कर्ण सिंह, जैव प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. नम्रता ढाका, संस्कृत विभाग की डॉ. सुमन तथा शिक्षक शिक्षा विभाग के डॉ. मूरू मारियो शामिल रहे।
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