Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि) में राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के तहत ‘पोषण वाटिका’ का शुभारंभ

पोषण वाटिका में पौधारोपण करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ।
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के अंतर्गत पोषण जागरूकता, आहार विविधता एवं पोषण-संवेदनशील कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुरुवार को ‘पोषण वाटिका’ की स्थापना एवं शुभारंभ किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने पोषण वाटिका का उद्घाटन करते हुए फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पोषण, खाद्य उत्पादन, स्वस्थ जीवनशैली एवं सतत विकास के बीच घनिष्ठ संबंध को रेखांकित किया।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने पोषण वाटिका में चीकू, जामुन, अमरूद, आंवला एवं मौसंबी सहित विभिन्न फलदार पौधों तथा तुलसी, पुत्रंजीव, सर्पगंधा एवं अपराजिता जैसे औषधीय पौधों का रोपण किया।
उन्होंने इस व्यावहारिक एवं समुदाय-केंद्रित पहल की संकल्पना के लिए कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अनिता कुमारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि पोषण केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध खाद्य उत्पादन, विविधतापूर्ण आहार, स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरणीय स्थिरता से भी है। पोषण वाटिका इन सभी पहलुओं को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान करेगी।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने दैनिक जीवन में औषधीय पौधों, कृषि जैव विविधता तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का समुचित उपयोग स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) की अध्यक्ष प्रो. सुनीता श्रीवास्तव ने अपने संदेश में कहा कि स्वस्थ भोजन की शुरुआत स्वस्थ खेती से होती है। उन्होंने पोषण और कृषि के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए पोषण-संवेदनशील कृषि को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
पोषण जीवविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने पोषण वाटिका को देशज फसलों, मोटे अनाज (मिलेट्स) एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य संसाधनों के अध्ययन, शिक्षण एवं अनुसंधान के लिए उपयोगी स्थल बताया।
उन्होंने कहा कि यह वाटिका विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को पोषण, कृषि जैव विविधता और स्थानीय खाद्य संसाधनों के संबंध को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान करेगी।

कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अनिता कुमारी ने पोषण वाटिका की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल देशज फसलों, मोटे अनाज, औषधीय पौधों, आहार विविधता तथा पोषण-संवेदनशील कृषि से संबंधित जागरूकता एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि वाटिका को शिक्षण, अनुसंधान और जन-जागरूकता के एक समन्वित मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
पोषण वाटिका में पौधरोपण अभियान को विश्वविद्यालय के उद्यान प्रभारी श्री विजय सांगवान एवं उनकी टीम का सहयोग प्राप्त हुआ। राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के संयोजक डॉ. अश्वनी कुमार, पोषण जीवविज्ञान विभाग के प्रो. कांति प्रकाश शर्मा, डॉ. सविता बुधवार, डॉ. तेजपाल ढेवा सहित अन्य शिक्षक, परास्नातक विद्यार्थी एवं शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।
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