Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र में 150 से अधिक बैंक शाखाएं बंद, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित

कुरुक्षेत्र में 150 से अधिक बैंक शाखाएं बंद, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित
Kurukshetra News: सप्ताह में पांच दिन काम (5-Day Banking) की व्यवस्था लागू करने और पेंशन अपडेशन समेत अपनी कई पुरानी मांगों को लेकर सरकारी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर शुक्रवार को धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में साफ नजर आया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले आयोजित इस सांकेतिक हड़ताल के कारण कुरुक्षेत्र जिले की 150 से अधिक बैंक शाखाओं के मुख्य द्वार पर ताले लटके रहे। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के काम पर न पहुंचने से सामान्य बैंकिंग गतिविधियां पूरी तरह चरमरा गईं।
हड़ताल की वजह से आम दिनों की तरह लेनदेन, चेक क्लीयरेंस और ड्राफ्ट बनाने जैसे रूटीन काम पूरी तरह ठप रहे। हालांकि, इस दौरान डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं, जिससे आम लोगों को नकदी निकासी में थोड़ी राहत जरूर मिली। फिर भी, जो ग्राहक चेक जमा करने या बड़े वित्तीय लेनदेन के सिलसिले में बैंक पहुंचे थे, उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। यूनियनों के अनुमान के मुताबिक, केवल एक दिन की इस तालाबंदी से जिले में 100 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग लेनदेन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
28 महीने पहले बनी थी सहमति, फिर भी सरकार ने अटकाया फैसला
SBI-OA के क्षेत्रीय महासचिव वेंकटेश नारायण ने बताया कि यह हड़ताल UFBU के आह्वान पर की गई है, जिसे AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBOC और INBEF समेत 7 बड़ी यूनियनों ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने बताया कि बैंककर्मियों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित कर हफ्ते में 5 दिन वर्किंग सिस्टम लागू किया जाए।
वेंकटेश नारायण के अनुसार, मार्च 2024 में ही इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक प्रबंधन के साथ हुई वार्ता में इस मुद्दे पर सहमति बन चुकी थी। कर्मचारियों ने इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव भी सहर्ष स्वीकार किया था। इसके बावजूद, वित्त मंत्रालय को भेजे गए इस प्रस्ताव पर ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। बैंक यूनियनों का कहना है कि 5 दिन बैंकिंग लागू होने से ग्राहकों के बैंकिंग समय में कोई कमी नहीं आएगी, बल्कि कर्मचारी अधिक ऊर्जा के साथ सेवा दे सकेंगे।
पुरानी पेंशन योजना से लेकर नई भर्तियों तक, मांग पत्र में कई मुद्दे शामिल
बैंक कर्मचारी नेता जसपाल यादव ने हड़ताल के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लड़ाई केवल पांच दिन के काम तक सीमित नहीं है। बैंक शाखाओं में लिपिक (क्लेरिकल) और सब-स्टाफ के खाली पदों पर तुरंत भर्ती, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने, पेंशन धारकों के लिए समान महंगाई भत्ता (DA) फॉर्मूला लागू करने और पुराने पेंशनर्स के एक्स-ग्रेशिया में संशोधन जैसी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इसके अलावा ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने और निजी बैंकों के कर्मचारियों को भी एक्स-ग्रेशिया का लाभ देने की मांग पर जोर दिया जा रहा है।
वार्ताएं बेनतीजा, अब 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी
गौरतलब है कि हड़ताल पर जाने से पहले 8 और 9 सितंबर को मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) और उप श्रम आयुक्त की मध्यस्थता में एक सुलह बैठक बुलाई गई थी, जिसमें वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। हालांकि, 5-डे बैंकिंग को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन न मिलने के कारण वार्ता बेनतीजा रही और यूनियनों को हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।
बैंक यूनियनों ने साफ कर दिया है कि अगर केंद्र सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। UFBU ने चेतावनी दी है कि इस एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के बाद 28, 29 और 30 सितंबर को लगातार तीन दिनों की हड़ताल की जाएगी। यदि इसके बाद भी बात नहीं बनी, तो 26 अक्टूबर से देशभर के बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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