Mahendragarh : हकेवि में ‘सेवा प्रबोधन-2026’ का आयोजन, युवाओं में सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता पर जोर
Mahendragarh : हकेवि में ‘सेवा प्रबोधन-2026’ का आयोजन, युवाओं में सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता पर जोर
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) में युवा एवं सेवा फाउंडेशन, हरियाणा की सातवीं वार्षिक व्याख्यान श्रृंखला ‘सेवा प्रबोधन-2026’ का आयोजन किया गया।
विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अध्ययन विभाग एवं युवा एवं सेवा फाउंडेशन, हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं में सेवा भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) देवेंद्र सिंह रहे, जबकि मुख्य वक्ता सामाजिक कार्यकर्ता श्री विनोद कुमार ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) टंकेश्वर कुमार ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं सेवा गीत के साथ हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन, अतिथि परिचय तथा युवा एवं सेवा फाउंडेशन के परिचय का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) देवेंद्र सिंह ने अपने उद्बोधन में सेवा को समाज के प्रति जिम्मेदारी और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बताया। उन्होंने युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा की भारत का विकसित देश बनना आर्थिक प्रगति है और विश्वगुरु बनना विश्व का जीवन के प्रति मार्गदर्शन करने के अर्थ में हैं। उन्होंने कहा कि एक कुशल और कौशल युक्त युवा ही विकसित भारत का स्वप्न साकार कर सकता है। उन्होंने कहा कि कोई कभी फेल नहीं होता बल्कि वह सीखता है। विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं की प्रेरणा बने।
अध्यक्षीय उद्बोधन में हकेंवि के कुलपति प्रो. (डॉ.) टंकेश्वर कुमार ने सेवा की भारतीय परंपरा और युवाओं की सामाजिक भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक के रूप में विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि सामुहिक संकल्प विकास की ओर ले जाता है और यह सेवा के भाव से ही संभव है। उन्होंने कहा दूसरों के लिए जीना ही सेवा है।
मुख्य वक्ता श्री विनोद कुमार ने सेवा के व्यापक अर्थ और समाज जीवन में इसके महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सेवा केवल किसी जरूरतमंद की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने तथा उन्हें जिम्मेदारी के साथ निभाने की भावना है। युवाओं को सेवा कार्यों से जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान वीडियो प्रस्तुति भी दी गई, जिसके माध्यम से सेवा एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रिचा, व्यावसायिक अध्ययन विभाग ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। मंच संचालन शोधार्थी सिमरण ने किया और सेवा गीत डॉ. अभिषेक ने किया। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम के संयोजन में प्रो. (डॉ.) आशीष माथुर, अधिष्ठाता, सतत अध्ययन पीठ, डॉ. सुयेश मिश्रा, सहायक आचार्य; डॉ. सुनील कुमार, सहायक आचार्य; एवं डॉ. रिचा, सहायक आचार्य, व्यावसायिक अध्ययन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में प्रो. आंनद शर्मा, प्रो. राजेन्द्र प्रसाद मीणा, डॉ. नीरज कर्ण सिंह आदि सहित शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित थे।
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