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Mahendragarh : हकेवि के गोद लिए गांव जांट में संस्कृत संभाषण शिविर संपन्न, संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने की अनूठी पहल

ppravesh kaushik
Mahendragarh : हकेवि के गोद लिए गांव जांट में संस्कृत संभाषण शिविर संपन्न, संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने की अनूठी पहल

Mahendragarh : हकेवि के गोद लिए गांव जांट में संस्कृत संभाषण शिविर संपन्न, संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने की अनूठी पहल

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Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के संस्कृत विभाग एवं संस्कृत भारती (हरियाणा) के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के गोद लिए गांव जांट स्थित श्री बालाजी मंदिर में आयोजित संस्कृत संभाषण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

 

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13 दिन तक चले इस शिविर का उद्देश्य संस्कृत भाषा को केवल अकादमिक एवं धार्मिक ग्रंथों तक सीमित न रखते हुए उसे आमजन की दैनिक बोलचाल का हिस्सा बनाना था।

 

शिविर के दौरान संस्कृत विभाग के शिक्षक डॉ. सुमित शर्मा ने ग्रामीणों, विद्यार्थियों एवं संस्कृत प्रेमियों को संस्कृत भाषा में दैनिक जीवन से जुड़े संवाद का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में पारंपरिक रूप से व्याकरण को रटने के बजाय संवाद एवं व्यवहार के माध्यम से संस्कृत सीखने पर विशेष जोर दिया गया।

 

इससे प्रतिभागियों में संस्कृत बोलने को लेकर बनी झिझक कम हुई और उन्होंने दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले सरल संस्कृत वाक्यों एवं संवादों का अभ्यास किया।

 

जांट गांव में आयोजित यह शिविर समुदाय से जुड़ाव और भारतीय ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। शिविर ने ग्रामीणों, विद्यार्थियों और भाषा प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां उन्होंने संस्कृत के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ने का अनुभव प्राप्त किया।

 

संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. पायल कंवर चन्देल ने बताया कि जांट गांव में आयोजित यह शिविर एक व्यापक अभियान की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आसपास के अन्य गांवों एवं विद्यालयों में भी संस्कृत संभाषण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 

 

इन प्रयासों का उद्देश्य संस्कृत को सरल एवं व्यवहारिक रूप में आम लोगों तक पहुंचाना तथा ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें लोग दैनिक जीवन में संस्कृत का सहज प्रयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि भाषा तभी जीवंत रहती है, जब उसका प्रयोग समाज के बीच निरंतर होता रहे। इसी भावना के साथ संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत को संवाद की भाषा के रूप में जनसामान्य तक पहुंचाने के प्रयास जारी रहेंगे।

 

 

 

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