Gurdev Singh Former IAS : 1984 Operation Blue star पर असहमति जताने वाले पूर्व आईएएस और शिक्षाविद गुरदेव सिंह का निधन
1984 Operation Blue star पर असहमति जताने वाले पूर्व आईएएस और शिक्षाविद गुरदेव सिंह का निधन
Gurdev Singh Former IAS | 1984 Operation Blue पंजाstar : प्रशासनिक गलियारों से लेकर शिक्षा जगत तक अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले प्रख्यात शिक्षाविद और पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी गुरदेव सिंह (Gurdev Singh Former IAS) अब हमारे बीच नहीं रहे। 95 वर्ष की आयु में उनका गुरुवार को निधन हो गया।
मूल रूप से पंजाब के फरीदकोट के रहने वाले गुरदेव सिंह (Gurdev Singh Former IAS) का जीवन सिद्धांतों, साहस और समाज सेवा की एक ऐसी मिसाल रहा है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रशासनिक और अकादमिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
1984 में दिखाया था प्रशासनिक साहस
गुरदेव सिंह के करियर का सबसे बड़ा और चर्चित अध्याय वर्ष 1984 (1984 Operation Blue star ) का है, जब वे अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उस संवेदनशील दौर में जब स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई यानी ‘1984 Operation Blue star ‘ की रूपरेखा तैयार हो रही थी, तब उन्होंने इस फैसले पर अपनी असहमति जताई थी।
अपने उसूलों और कर्तव्यनिष्ठा पर अडिग रहने के कारण उन्हें अपने इस साहसिक रुख की कीमत तबादले के रूप में चुकानी पड़ी थी, लेकिन इतिहास में उनका यह फैसला प्रशासनिक ईमानदारी के एक बड़े उदाहरण के रूप में दर्ज हो गया।
शिक्षा और समाज को समर्पित जीवन
आईएएस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका सफर थमा नहीं, बल्कि उन्होंने अपना शेष जीवन समाज और शिक्षा के नाम कर दिया। वर्ष 2004 से वे ‘सिख एजुकेशन सोसाइटी’ के अध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे और फरीदकोट की ‘संगत साहिब भाई फेरू सिख एजुकेशन सोसाइटी’ से भी जुड़े रहे।
उनके कुशल नेतृत्व का ही परिणाम था कि उनके मार्गदर्शन में चलने वाले कई संस्थानों ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की रैंकिंग में ‘A’ और ‘A+’ ग्रेड हासिल किए। उनके इन अतुलनीय योगदानों को देखते हुए दिल्ली की ‘ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटेलेक्ट्स’ ने उन्हें ‘पंजाब रत्न’ से सम्मानित किया था।
खेल और बौद्धिक जगत में भी छोड़ी छाप
एक बेहतरीन प्रशासक और शिक्षाविद् होने के साथ-साथ गुरदेव सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। अपने छात्र जीवन में वे कॉलेज के टॉपर और यूनियन अध्यक्ष रहने के साथ-साथ एक शानदार एनसीसी कैडेट और अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी भी रहे।
खेल प्रेम के चलते उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं में अहम जिम्मेदारियां संभालीं। इसके अलावा, वे ‘इंस्टीट्यूट ऑफ सिख स्टडीज’ के संरक्षक और ‘इंटरनेशनल सिख कन्फेडरेशन’ के सह-संयोजक जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में भी सक्रिय रहे।
मरणोपरांत देहदान की अनूठी परंपरा
गुरदेव सिंह ने जाते-जाते भी समाज के नाम एक ऐसा संदेश छोड़ दिया जो पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सीय अनुसंधान और शिक्षा के लिए पीजीआई चंडीगढ़ को दान कर दिया गया। श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जसविंदर सिंह ने इस कदम को बेहद प्रेरणादायी बताया है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2018 में उनकी धर्मपत्नी सुरजीत कौर के निधन पर भी परिवार ने उनका शरीर पीजीआई को ही दान किया था। उनके निधन पर पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, डॉ. बीरिंदर कौर और कर्नल जसमेर सिंह बाला समेत तमाम गणमान्य लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
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