Punjab DA dispute High Court : पंजाब में कर्मचारियों के डीए विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, चीफ सेक्रेटरी तलब
पंजाब में कर्मचारियों के डीए विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, चीफ सेक्रेटरी तलब
Punjab DA dispute High Court : पंजाब में सरकारी मुलाजिमों और पेंशनभोगियों के लंबे समय से अटके डीए (महंगाई भत्ता) और एरियर का विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर सीधे कानूनी टकराव में बदल गया है। मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया।
अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है। इस सख्त कदम के बाद से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि कर्मचारियों के बकाये को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है।
क्या है पूरा विवाद और अदालती आदेश?
विवाद की जड़ें कर्मचारियों की उन लंबित किस्तों और एरियर में हैं, जिनकी मांग लंबे समय से राज्यभर के मुलाजिम संगठन उठा रहे हैं। बीते 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल (PSPCL) की अपीलों को खारिज करते हुए कर्मचारियों का बकाया डीए केंद्र सरकार के पैटर्न पर जारी करने के निर्देश दिए थे।
अदालत ने इसके लिए मात्र 15 दिन का वक्त दिया था और यह भी चेतावनी दी थी कि तय समयसीमा में भुगतान न होने की स्थिति में बकाया राशि पर 6% सालाना साधारण ब्याज भी वसूला जाएगा। इससे पहले अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि जब तक कर्मचारियों का बकाया नहीं चुकता किया जाता, तब तक सरकार को विज्ञापनों पर फिजूलखर्च बंद करना चाहिए।
सरकार का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट का रुख
दूसरी तरफ, पंजाब सरकार का यह तर्क रहा है कि इतनी बड़ी वित्तीय राशि को चंद दिनों के भीतर जारी करना खजाने पर भारी और संवैधानिक रूप से अव्यवहारिक है। इसी दलील के साथ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (Special Leave Petition) दाखिल की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की तरफ से कुछ तकनीकी आपत्तियां उठाए जाने के कारण वहां सुनवाई में विलंब हुआ।
इसी देरी को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि फैसले को चुनौती देने भर से आदेश स्वतः निलंबित नहीं हो जाता। कोर्ट ने राज्य को हिदायत दी थी कि वह या तो सुप्रीम कोर्ट से तुरंत स्टे ले या फिर हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करे।
मुलाजिमों का आंदोलन और 50% डीए का भरोसा
कानूनी दांव-पेच के बीच राज्य के कर्मचारी संगठनों ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन किए। सितंबर महीने में चले इस आंदोलन के दौरान सरकार ने पहले ‘नो वर्क, नो पे’ का रुख भी अपनाया, लेकिन बढ़ते दबाव के बाद मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और बाद में मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ कर्मचारियों की उच्चस्तरीय बैठकें हुईं।
इन बैठकों में यह सहमति बनी कि पंजाब के कर्मचारियों को 50% डीए दिया जाएगा और 8% बकाया डीए जारी किया जाएगा, जिससे सरकारी खजाने पर करीब 248 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके बावजूद, समग्र बकाए और एरियर के भुगतान को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न होने के कारण मामला अभी भी अदालत की चौखट पर बना हुआ है। अब सभी की निगाहें 5 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब मुख्य सचिव की व्यक्तिगत पेशी के दौरान हाईकोर्ट इस पर कोई बड़ा और अंतिम निर्देश दे सकता है।
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