72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स: कार्तिक-ममूटी बेस्ट एक्टर, यामी गौतम बेस्ट एक्ट्रेस; धनुष को दो सम्मान
यामी गौतम बेस्ट एक्ट्रेस
72nd National Film Awards: 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का आयोजन इस बार राजधानी दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह में पहुंचकर अलग-अलग श्रेणियों में चुने गए विजेताओं को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् के गायन के साथ हुई। नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के इतिहास में यह बदलाव खास रहा, क्योंकि अब तक पुरस्कार वितरण समारोह आमतौर पर दिल्ली में आयोजित होता रहा है। इस बार सरकार ने इसे देश के दूसरे हिस्से में आयोजित करने का फैसला किया। समारोह के लिए केवड़िया को चुना गया, जहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और आसपास का पर्यटन क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण है।
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को की गई थी। इसके बाद मंगलवार को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने विजेताओं को औपचारिक रूप से पुरस्कार प्रदान किए। फिल्मों, कलाकारों और तकनीकी टीमों के साथ-साथ लंबे समय से भारतीय सिनेमा में योगदान देने वाले कलाकारों को भी इस समारोह में सम्मानित किया गया।
कार्तिक आर्यन और ममूटी को बेस्ट एक्टर, यामी गौतम बनीं बेस्ट एक्ट्रेस
इस बार बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दो अभिनेताओं को दिया गया। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनके अभिनय के लिए यह सम्मान मिला, जबकि मलयालम अभिनेता ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए बेस्ट एक्टर चुना गया। दोनों कलाकारों के लिए यह राष्ट्रीय स्तर पर अभिनय के सम्मान का बड़ा अवसर रहा। कार्तिक आर्यन ने ‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई थी। फिल्म एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी पर आधारित है, जिसने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपनी पहचान बनाई। कार्तिक ने इस किरदार के लिए अपने लुक और शारीरिक बदलाव पर भी काम किया था। दूसरी ओर, ममूटी ने ‘ब्रह्मयुगम’ में अलग तरह का किरदार निभाया, जिसे फिल्म की कहानी और वातावरण का अहम हिस्सा माना गया।
बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए दिया गया। फिल्म में उन्होंने खुफिया अधिकारी की भूमिका निभाई थी और कहानी जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 से जुड़े घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। इसी फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार भी मिला, जिससे ‘आर्टिकल 370’ इस साल के प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं में शामिल रही। ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। राजकुमार राव अभिनीत यह फिल्म दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोल्ला के जीवन से प्रेरित है। फिल्म ने उनके संघर्ष, शिक्षा और कारोबारी सफर को पर्दे पर दिखाया। हिंदी सिनेमा की इस फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना इसके लिए एक अहम उपलब्धि रही।
धनुष को दो अलग-अलग सम्मान, ‘रायन’ को बेस्ट तमिल फिल्म
तमिल अभिनेता धनुष के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स खास रहे। उन्हें दो अलग-अलग कैटेगरी में सम्मान मिला। उनकी फिल्म ‘रायन’ को बेस्ट तमिल फिल्म का पुरस्कार दिया गया, जबकि ‘कैप्टन मिलर’ में उनके अभिनय के लिए उन्हें स्पेशल मेंशन मिला। ‘रायन’ धनुष के निर्देशन में बनी फिल्म है और इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका भी निभाई। फिल्म को तमिल सिनेमा की श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से धनुष की बतौर अभिनेता और निर्देशक दोनों भूमिकाओं को पहचान मिली। वहीं ‘कैप्टन मिलर’ में उनके अभिनय को स्पेशल मेंशन के जरिए सम्मानित किया गया। इस तरह धनुष इस संस्करण में उन कलाकारों में रहे जिन्हें एक से ज्यादा सम्मान मिले। राष्ट्रीय पुरस्कारों में क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों और कलाकारों को मिलने वाली पहचान भी इस बार स्पष्ट तौर पर नजर आई।
45 पुरस्कारों में अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों को सम्मान
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में कुल 45 पुरस्कार श्रेणियां शामिल हैं। इनमें 26 फीचर फिल्म, 16 नॉन-फीचर फिल्म, सिनेमा पर लेखन की दो श्रेणियां और एक दादासाहेब फाल्के पुरस्कार शामिल है। इन पुरस्कारों के जरिए भारतीय सिनेमा के अलग-अलग भाषाई और रचनात्मक क्षेत्रों में किए गए काम को सम्मान दिया गया। इस बार लोकप्रिय फिल्मों के साथ क्षेत्रीय सिनेमा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। ‘कल्कि 2898 एडी’ को बेस्ट फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का पुरस्कार दिया गया। ‘अमरन’ के लिए राजकुमार पेरियासामी को बेस्ट डायरेक्टर चुना गया। वहीं ‘पुष्पा: द रूल पार्ट-2’, ‘स्त्री 2’, ‘भूल भुलैया 3’ और ‘कैप्टन मिलर’ जैसी फिल्मों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सम्मान मिला। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार इस बार वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को दिया गया। भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें इस सर्वोच्च फिल्म सम्मान के लिए चुना गया। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में अनंत नाग ने कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है और दक्षिण भारतीय सिनेमा के साथ हिंदी सिनेमा में भी उनकी पहचान रही है।
7 पुरस्कारों से शुरू हुआ सफर अब 45 श्रेणियों तक पहुंचा
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की शुरुआत 1954 में हुई थी। उस समय सिर्फ सात पुरस्कार दिए गए थे। इसके बाद भारतीय सिनेमा के विस्तार के साथ इन पुरस्कारों की संख्या और श्रेणियां लगातार बढ़ती गईं और अब 72वें संस्करण में कुल 45 पुरस्कार श्रेणियां शामिल हैं। शुरुआती दौर में जहां पुरस्कारों का दायरा सीमित था, वहीं आज फीचर फिल्मों के अलावा नॉन-फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, तकनीकी योगदान, सिनेमा पर लेखन और जीवनभर के योगदान के लिए अलग-अलग सम्मान दिए जाते हैं। इससे क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने का अवसर मिला है। 72वें संस्करण में भी हिंदी, तमिल, मलयालम और अन्य भाषाओं की फिल्मों और कलाकारों को सम्मान मिला। इससे यह भी सामने आता है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अब केवल मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा तक सीमित नहीं हैं। भारतीय सिनेमा की अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में बनने वाली फिल्मों को इन पुरस्कारों में जगह मिलती रही है।
अगली बार किसी और टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर हो सकता है समारोह
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली से बाहर नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स आयोजित करने के फैसले को लेकर कहा कि ऐसे आयोजनों को अलग-अलग पर्यटन स्थलों तक ले जाने का उद्देश्य उन जगहों को देश के सामने लाना भी है। उन्होंने कहा कि समारोह को दिल्ली से बाहर करने के फैसले को लेकर विवाद करना उचित नहीं है। वैष्णव ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भी नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का आयोजन अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर किया जा सकता है। इससे पुरस्कार समारोह केवल फिल्म इंडस्ट्री का आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित शहर और राज्य के पर्यटन को भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिल सकता है। इस बार गुजरात के एकता नगर को इसकी मेजबानी मिली। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास का क्षेत्र देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। ऐसे में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसे बड़े आयोजन को यहां आयोजित करने से गुजरात के इस पर्यटन क्षेत्र को भी व्यापक राष्ट्रीय दृश्यता मिली।
