SIR के खिलाफ पंजाब कांग्रेस का मार्च: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग, वड़िंग बोले- चुनाव तक रोकें प्रक्रिया
SIR के खिलाफ पंजाब कांग्रेस का मार्च
Chandigarh Congress Protest: पंजाब कांग्रेस ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सेक्टर-17 स्थित RBI कार्यालय के पास जुटे और वहां से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता पुतले लेकर भी पहुंचे। पार्टी का यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है और चुनाव से कुछ महीने पहले मतदाता सूची में बड़े बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
प्रदर्शन से पहले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने CEC को पद से हटाने, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की। वड़िंग ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। पार्टी ने इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक प्रदर्शन करने का फैसला किया।
विधानसभा चुनाव तक SIR रोकने की मांग
वड़िंग ने पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव तक SIR रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए इस्तेमाल की गई मौजूदा मतदाता सूचियों के आधार पर कराए जाएं और चुनाव से पहले किसी मतदाता का नाम हटाया नहीं जाए। उनका कहना है कि नए मतदाताओं के लिए Form-6 में जो अतिरिक्त जानकारी मांगी जा रही है, उससे पहली बार मतदान करने वाले योग्य लोगों के सामने दिक्कतें पैदा हो रही हैं। खास तौर पर पिछले SIR की मतदाता सूची में माता-पिता या दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी देने की शर्त को लेकर सवाल उठाए गए हैं। वड़िंग ने दावा किया कि मौजूदा प्रक्रिया से पंजाब में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से कुछ महीने पहले ऐसा होने पर मतदाताओं के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल उठेंगे। कांग्रेस की मांग है कि विधानसभा चुनाव के बाद SIR को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, Form-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों से संबंधित थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि इन आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, एक मामले में चुनाव आयुक्तों ने Form-6 में किए गए बदलाव को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताया था। इसमें नए मतदाताओं से पिछले SIR की मतदाता सूची में उनके या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।
चुनाव आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्पष्टीकरण दिया। आयोग ने कहा कि तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक SIR और उससे जुड़े अन्य फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इससे विवाद के दो पक्ष सामने आते हैं। एक तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के फैसले सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में अलग-अलग मुद्दों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटाबेस की पहुंच जैसे विषय शामिल थे।
पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब आने के साथ SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पंजाब कांग्रेस का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में बड़े बदलाव नहीं होने चाहिए। पार्टी ने मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की मांग रखी है। वहीं, SIR की प्रक्रिया और उसके तहत मतदाता सूचियों के सत्यापन को लेकर चुनाव आयोग का अपना पक्ष है। ऐसे में पंजाब में आने वाले दिनों में मतदाता सूची और SIR राजनीतिक दलों के बीच बहस का बड़ा मुद्दा बने रहने की संभावना है।
