Mahendragarh : हकेवि महेंद्रगढ़ में पांच दिवसीय ड्रोन कार्यशाला का शानदार समापन, 58 विद्यार्थियों को मिले प्रमाण-पत्र
Mahendragarh : हकेवि महेंद्रगढ़ में पांच दिवसीय ड्रोन कार्यशाला का शानदार समापन, 58 विद्यार्थियों को मिले प्रमाण-पत्र
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा एयरोड्रोन रोबोटिक्स के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय ड्रोन कार्यशाला का समापन प्रमाण-पत्र वितरण समारोह के साथ हुआ।
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने मानवरहित हवाई वाहन की मूल अवधारणाओं और घटकों को समझने के साथ ड्रोन जोड़ने, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, तार जोड़ने, नियंत्रक सॉफ्टवेयर तथा उड़ान-नियंत्रक के विन्यास का प्रशिक्षण प्राप्त किया। समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार मुख्य अतिथि के रूप में तथा एयरोड्रोन रोबोटिक्स के वरिष्ठ अधिकारी कर्नल अमित शर्मा और कर्नल अमित कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समापन सत्र में समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, संकाय सदस्य, आयोजन समिति के सदस्य और कर्मचारी भी समारोह में शामिल हुए।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपने संबोधन में ड्रोन एवं मानवरहित हवाई वाहन क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान, अभिकल्पना, विकास, उद्यमिता और रोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र को केवल ड्रोन उड़ाने तक सीमित न रखकर व्यापक तकनीकी अवसरों के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वदेशी ड्रोन एवं रोबोटिकी तकनीकों की अभिकल्पना और विकास को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर दिया।
इसी क्रम में कर्नल अमित शर्मा ने मानवरहित हवाई वाहन तकनीक में बढ़ते अवसरों को रेखांकित करते हुए कहा कि हम पहले कहते थे कि आकाश ही सीमा है; अब ड्रोन और मानवरहित हवाई वाहनों के उदय के साथ हम कहते हैं कि आकाश तो बस शुरुआत है।

उन्होंने कहा कि एयरोड्रोन रोबोटिक्स विश्वविद्यालय के साथ औपचारिक समझौता ज्ञापन और सहयोगात्मक संबंध स्थापित करने की दिशा में काम करेगा। उनके अनुसार, दोनों संस्थान मिलकर निर्माण करें, नवाचार करें और उड़ान भरें की भावना के साथ शैक्षणिक एवं औद्योगिक स्तर पर संयुक्त रूप से काम कर सकते हैं।
कार्यशाला के सैद्धांतिक और व्यावहारिक सत्रों में विद्यार्थियों को ड्रोन के प्रकार, उड़ान-नियंत्रक, संवेदक, मोटर, पंखे, गति-नियंत्रक और बैटरी सहित प्रमुख प्रणालियों की जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों ने ड्रोन जोड़ने, इलेक्ट्रॉनिक घटकों पर काम करने, नियंत्रक सॉफ्टवेयर स्थापित एवं विन्यस्त करने तथा उड़ान-नियंत्रक के विन्यास और अंशांकन का अभ्यास किया। संगणक-आधारित आभासी अभ्यास में उड़ान भरने, हवा में स्थिर रहने, गति नियंत्रण और निर्धारित उड़ान-पथ का अभ्यास कराने के बाद, विश्वविद्यालय के खेल परिसर में एयरोड्रोन रोबोटिक्स की टीम के मार्गदर्शन में वास्तविक ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रतिभागियों को ड्रोन विकास, इलेक्ट्रॉनिकी, अंतःस्थापित प्रणालियों, उड़ान-नियंत्रण तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों, अनुसंधान एवं विकास तथा औद्योगिक उपयोगों में उपलब्ध अवसरों से भी अवगत कराया गया। कार्यशाला में कुल 58 विद्यार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया और समापन समारोह में प्रमाण-पत्र प्राप्त किए।
पाँच दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन एवं समापन में प्रो. विकास गर्ग, अधिष्ठाता, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय; प्रो. राकेश कुमार; डॉ. विपिन कुमार; श्री अनंत राजी बारा, संयोजक; प्रो. फूल सिंह; डॉ. संगीता; डॉ. नितिन और डॉ. विशाल ने मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया।
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