October 1, 2026

Panipat Consumer Court: कार इंश्योरेंस क्लेम पर पानीपत उपभोक्ता अदालत का फैसला, जानें शिकायतकर्ता को क्यों भरना पड़ेगा पार्किंग शुल्क

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Panipat Consumer Court: कार इंश्योरेंस क्लेम पर पानीपत उपभोक्ता अदालत का फैसला, जानें शिकायतकर्ता को क्यों भरना पड़ेगा पार्किंग शुल्क

कार इंश्योरेंस क्लेम पर पानीपत उपभोक्ता अदालत का फैसला, जानें शिकायतकर्ता को क्यों भरना पड़ेगा पार्किंग शुल्क

Panipat Consumer Court: हरियाणा के पानीपत जिले में कार बीमा दावा और वर्कशॉप में अटकी गाड़ी को लेकर चल रहे एक लंबे कानूनी विवाद में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला आ गया है। (Panipat District Consumer Forum) आयोग ने शिकायतकर्ता मोहिनी सिंह को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर 40 हजार रुपये का पार्किंग शुल्क जमा कराकर वर्कशॉप से अपनी मरम्मत की हुई कार वापस ले लें।

आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तय 45 दिनों की समय-सीमा के भीतर कार नहीं उठाई गई, तो वर्कशॉप संचालक के पास आयोग में आवेदन देकर वाहन की खुली नीलामी कराने का पूरा अधिकार होगा।

पशु को बचाने के चक्कर में डिवाइडर से टकराई थी कार, 2020 से अटका था मामला

पूरा विवाद साल 2019 का है। पानीपत निवासी मोहिनी सिंह ने 25 दिसंबर 2016 को करीब 4.45 लाख रुपये में मारुति सुजुकी वैगनआर खरीदी थी। (Car Workshop Parking Charge Rules) 10 अगस्त 2019 को शामली-मेरठ रोड पर सफर के दौरान अचानक सड़क पर आए एक पशु को बचाने की कोशिश में उनकी कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे में गाड़ी को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद उसे अधिकृत सर्विस सेंटर (वर्कशॉप) भेजा गया।

वर्कशॉप ने गाड़ी सुधारने का एस्टीमेट 4,40,093 रुपये बताया, जबकि उस समय कार की कुल बीमित घोषित मूल्य (IDV) 3,39,643 रुपये ही थी। बीमा कंपनी द्वारा क्लेम में अड़ंगा लगाने और मरम्मत के दौरान गाड़ी में और नुकसान होने के आरोपों के बीच बात बिगड़ती चली गई। आखिरकार, मोहिनी सिंह ने 2020 में मारुति सुजुकी, वर्कशॉप और नेशनल इंश्योरेंस के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

नई कार और 2 लाख मुआवजे की मांग खारिज, जानिए कोर्ट में क्यों पचड़ा फंसा

उपभोक्ता आयोग में दाखिल अपनी याचिका में मोहिनी सिंह ने मांग की थी कि उन्हें या तो नई कार दी जाए या फिर गाड़ी की पूरी कीमत (4,45,204 रुपये) लौटाई जाए। साथ ही, वर्षों तक हुए मानसिक उत्पीड़न के एवज में 2 लाख रुपये के मुआवजे का दावा भी ठोका गया था।

दूसरी ओर, सुनवाई के दौरान कंपनियों ने अपनी दलीलें रखीं। मारुति सुजुकी ने कहा कि कार की वारंटी खत्म हो चुकी थी। वर्कशॉप ने कोर्ट को बताया कि गाड़ी की मरम्मत काफी समय पहले पूरी कर दी गई थी और बीमा कंपनी ने मरम्मत की राशि का भुगतान भी स्वीकार कर लिया था, लेकिन ग्राहक गाड़ी वापस ले जाने को तैयार नहीं थीं।

आयोग ने क्यों सुनाया पार्किंग चार्ज भरकर गाड़ी ले जाने का आदेश?

दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आयोग ने पाया कि हादसे के वक्त कार पूरी तरह बीमित थी और वर्कशॉप में उसकी मरम्मत का काम पूरा किया जा चुका था। (Panipat Consumer Court News) रिकॉर्ड पर ऐसा कोई तकनीकी या ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिससे साबित हो कि कार पूरी तरह से बर्बाद (टोटल लॉस) हो चुकी थी।

इसी आधार पर आयोग ने नई गाड़ी देने या पूरी बीमित राशि लौटाने की मांग को नकार दिया। चूंकि कार सालों से वर्कशॉप के परिसर में खड़ी रही, इसलिए आयोग ने 40 हजार रुपये का पार्किंग चार्ज तय करते हुए शिकायतकर्ता को अपनी गाड़ी ले जाने का आखिरी मौका दिया है।

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