Karnal Police Action: एमपी के बुरहानपुर से करनाल पहुंची अवैध पिस्टलों की खेप, CIA-3 ने 8 पिस्टल और 20 कारतूस के साथ 3 दबोचे
एमपी के बुरहानपुर से करनाल पहुंची अवैध पिस्टलों की खेप, CIA-3 ने 8 पिस्टल और 20 कारतूस के साथ 3 दबोचे
Karnal Police Action: हरियाणा में संगठित अपराध और अंतरराज्यीय हथियार तस्करों के खतरनाक गठजोड़ पर करनाल पुलिस ने एक बार फिर करारी चोट की है। सीआईए-3 (Karnal CIA 3 Police Raid) की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से करनाल (Burhanpur Illegal Weapons Racket) तक फैले एक हाई-टेक हथियार तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। पुलिस ने गिरोह के कब्जे से 8 अवैध देसी पिस्टल और 20 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह महज एक सामान्य जब्ती नहीं है, बल्कि हरियाणा में किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की साजिश को समय रहते नाकाम करने की बड़ी सफलता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पुलिस ने तफ्तीश की परतें उघेड़ीं, तो इसका सबसे चिंताजनक पहलू ‘जेल नेटवर्क’ के रूप में सामने आया। गिरफ्तार किए गए तीनों मुख्य आरोपियों—विकास उर्फ विक्की, श्रवण ठाकुर और जगेश्वर की आपस में मुलाकात अलग-अलग मुकदमों में जेल में बंद रहने के दौरान हुई थी। एनडीपीएस, पॉक्सो, आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले जैसे गंभीर अपराधों में बंद इन तीनों अपराधियों ने सलाखों के पीछे ही बाहर निकलकर हथियार तस्करी का गिरोह बनाने का खाका तैयार किया था।
बुरहानपुर बना अवैध हथियारों का गढ़, ‘हैंडलर’ बनकर काम कर रहे थे आरोपी
तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि हथियारों की यह खेप मध्य प्रदेश के कुख्यात इलाके बुरहानपुर से उठाई गई थी। बुरहानपुर लंबे समय से देश के विभिन्न राज्यों में अवैध हथियारों के निर्माण और सप्लाई का गढ़ माना जाता रहा है। पकड़े गए आरोपी खुद मुख्य शूटर या सीधा सौदा करने वाले खरीदार नहीं थे, बल्कि वे ‘हैंडलर’ (मास्टरमाइंड और खरीदार के बीच की कड़ी) के रूप में काम कर रहे थे।
इनका मुख्य काम मध्य प्रदेश के अवैध कारखानों से हथियारों की सुरक्षित डिलीवरी उठाकर करनाल पहुंचाना और फिर किसी तीसरे बड़े आपराधिक गिरोह के सुपुर्द करना था।
ताश के पत्तों की तरह बिखरा नेटवर्क: काछवा पुल से दमोह तक ताबड़तोड़ दबिश
इस पूरे गिरोह के सफाए की शुरुआत 15 सितंबर को हुई, जब करनाल पुलिस की सीआईए-3 टीम को गुप्त सूचना मिली। (Police Raid Karnal) पुलिस ने काछवा पुल के पास जाल बिछाकर सबसे पहले विकास उर्फ विक्की को दबोचा। विक्की की तलाशी लेने पर उसके पास से 2 पिस्टल और 3 जिंदा कारतूस बरामद हुए।
करनाल के एसपी गंगाराम पूनिया (या करन गोयल) के निर्देशों पर जब पुलिस टीम ने विक्की से सख्ती से पूछताछ की, तो इस नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश के दमोह जिले तक जुड़ गए। करनाल पुलिस की विशेष टीम ने बिना समय गंवाए दमोह में दबिश दी और वहां से श्रवण ठाकुर व जगेश्वर को धर दबोचा। इनके गुप्त ठिकाने से पुलिस को 6 और पिस्टल तथा 17 कारतूस बरामद हुए।
शातिर तस्करों का पुराना आपराधिक इतिहास, अब असली ‘रिसीवर’ की तलाश
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक पकड़े गए तीनों आरोपियों का लंबा-चौड़ा आपराधिक इतिहास रहा है। मुख्य आरोपी विकास उर्फ विक्की पर आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस और मारपीट जैसे कुल 7 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। वहीं दूसरे आरोपी श्रवण ठाकुर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत 3 से 4 मामले दर्ज हैं, जबकि तीसरे आरोपी जगेश्वर के खिलाफ भी आपराधिक केस दर्ज पाया गया है।
फिलहाल मुख्य आरोपी विक्की को अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किए गए श्रवण और जगेश्वर को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। करनाल पुलिस अब इस बात की कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में पिस्टल और कारतूस हरियाणा में किस गिरोह या गैंगस्टर को सौंपे जाने थे और इनका इस्तेमाल किस वारदात में होना था।
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